दुखद: पंतनगर यूनिवर्सिटी में दो स्टूडेंट्स ने उठाया आत्मघाती कदम, एक की मौत, एक की हालत गंभीर 

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पंतनगर, प्रेस 15 न्यूज। पंतनगर यूनिवर्सिटी में लगातार स्टूडेंट्स के सुसाइड के मामले आ रहे हैं। महज कुछ घंटों के भीतर दो छात्रों ने फांसी लगाकर जिंदगी खत्म करने की कोशिश की, जिसमें से एक की मौत हो गई है जबकि दूसरे की हालत गंभीर है। पंतनगर यूनिवर्सिटी मामले में चुप्पी साधे है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्वसरैया भवन के कमरा नंबर 61 में बीटेक इलेक्ट्रिकल फाइनल ईयर के स्टूडेंट विवेक आर्य ने सोमवार रात करीब 10:30 बजे फंदा लगाकर सुसाइड करने की कोशिश की। साथी छात्रों ने संदिग्ध स्थिति देखकर दरवाजा तोड़ा और उसे नीचे उतारकर तत्काल वार्डन और अधिष्ठाता छात्र कल्याण को सूचना दी।

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आननफानन उसे पहले यूनिवर्सिटी अस्पताल और बाद में रुद्रपुर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जान बचा ली। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

इससे मात्र 12 घंटे पहले, पंतनगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के रजत जयंती छात्रावास में बीटेक सिविल तृतीय वर्ष के छात्र अक्षत सैनी का शव कमरे में फंदे से लटका मिला। पुलिस को मौके से उसकी डायरी और मोबाइल मिला, लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। छात्र रुड़की का रहने वाला बताया जा रहा है।

अक्षत सैनी (फाइल फोटो)

जानकारी के अनुसार, अक्षत लंबे समय से मानसिक उलझनों से जूझ रहा था। वह अपनी डायरी में रोजमर्रा की बातें लिखता था और कई मुद्दों पर खुद से सवाल-जवाब करता था। मानसिक असमंजस और तनाव धीरे-धीरे उसे भीतर से तोड़ रहा था।

सोमवार सुबह 9:30 बजे उसकी परीक्षा थी। साथी छात्र जब उसे परीक्षा के लिए बुलाने पहुंचे, तो हक्के बक्के रह गए।

मृतक छात्र के कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें उसने लिखा है कि शायद अब सब चीजें कंट्रोल से बाहर होती जा रही हैं। रोना अब किसी के भी आगे अच्छा नहीं लगता। मेरी तरफ चाहे दोस्त हों या घरवाले, कोई ध्यान भी नहीं देता। विशेषकर मेरी बातों पर सब लोग यही बोलकर छोड़ देते हैं कि ये सब फालतू बातें सोचता है। हालांकि मैं अब तो कोई फालतू बात सोचता नहीं, बस ये लगता है सब हाथ से निकलता जा रहा है। घर भी वापस नहीं जा सकता क्योंकि सेकेंड ईयर में जब गया था तो अपना हाल बद से बदतर होते हुए देखा है मैंने। शायद मैं घर वालों और घर वाले मुझसे से परेशान हो चुके हैं। तो अब घर वापसी का भी कोई ऑप्शन नहीं है। ऊपर से सिविल में आईआर और बैक तो जैसे विरासत में मिली हैं इस डिपार्टमेंट को। पापा को सोचता हूं सब बता दूं, पर जब उनकी टेंशन देखता हूं और इस उम्र में भी बिजनेस में उलझे देखता हूं तो और टेंशन देने का मन नहीं करता। अंत में उसने अपने एडवाइजर डाॅ. एसके कटारिया का उनके सहयोग के लिए धन्यवाद किया।

साथी छात्रों के अनुसार अक्षत पिछले एक वर्ष से मानसिक तनाव में था। सेकेंड ईयर में वह इलाज के लिए एक-डेढ़ महीने घर पर रहा था जिससे वह कक्षाएं अटेंड नहीं कर पाया। इसके चलते उसकी तीन बैक (पुनः परीक्षा) और दो आईआर (कक्षाओं में अनियमित उपस्थिति) लगी थीं जिससे वह आहत था और अंदर ही अंदर घुट रहा था।

अक्षत के पिता रुड़की के साथ ही गाजियाबाद के सेक्टर-23 स्थित न्यू फ्रेंड्स काॅलोनी में सपरिवार रहकर व्यवसाय करते हैं।

अक्षत की मौत ने एक बार फिर विश्वविद्यालय की छात्र कल्याण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले पांच साल में कैंपस में चार छात्रों ने आत्महत्या की है। 12 सितंबर को किच्छा निवासी नीरज की आत्महत्या की थी।

फिलहाल इन दो मामलों के सामने आने के बाद हर बार की तरह यूनिवर्सिटी ने हॉस्टल मॉनिटरिंग कड़ी करने और काउंसलिंग व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश जारी किए हैं।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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