
देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। बीते कुछ समय से ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं जहां खुद को मित्र पुलिस का तमगा देने वाली उत्तराखंड पुलिस का स्याह चेहरा पुलिसिंग को शर्मसार करने वाला रहा है। पीड़ितों को कहने को मजबूर होना पड़ा कि इस पुलिस ने तो गुलामी के दिनों की अंग्रेज पुलिस को भी पीछे छोड़ दिया।
अभी उत्तराखंड के जिस भी गांव शहर से आप इस खबर को पढ़ रहे हैं, वहां भी जरूर कोई न कोई ऐसा वाकया सामने आया होगा जहां न्याय की आस में थाना चौकी फरियाद लेकर गये पीड़ित को पुलिस ने सताया होगा। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं, कोई देखने वाला नहीं। सोशल मीडिया में जरूर पुलिस की ज्यादती के चर्चे हुए। ऐसे में शासन तक पुलिस के गुंडाराज वाली कार्यशैली की खबरें न पहुचें, यह भी संभव नहीं।
यही वजह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस और प्रशासन का प्रत्येक विभाग आम जनमानस के प्रति संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ कार्य करे।
सोमवार को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन, राजस्व, नशा मुक्ति, अभियोजन, कारागार सुधार एवं जनशिकायत निवारण से जुड़े विषयों पर गहन समीक्षा की।
बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस थानों और चौकियों के स्तर पर वर्क कल्चर में तत्काल सुधार किया जाए। आम नागरिकों के साथ मानवीय, संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित हो। निर्दोष लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान करने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा।
कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा से संबंधित शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लिया जाए। कानून व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
अपराध नियंत्रण व पुलिस व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आपराधिक मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए। रात्रि गश्त को और अधिक सघन किया जाए तथा निरंतर पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए। 1905 हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा कर जीरो पेंडेंसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
पर्यटन और ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद राज्य में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इसे देखते हुए होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात प्रबंधन एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी सभी तैयारियाँ समयबद्ध रूप से पूरी की जाएँ।
उन्होंने बताया कि कैंची धाम बाईपास जून माह तक पूर्ण कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी।
लैंड फ्रॉड पर सख्त कानून
मुख्यमंत्री ने भूमि घोटालों पर कठोर कानून बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि लैंड फ्रॉड में संलिप्त दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
नशा मुक्ति को बने जन आंदोलन
मुख्यमंत्री ने नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए। प्रत्येक जनपद से मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसकी नियमित समीक्षा गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेशक करेंगे।
अभियोजन व्यवस्था पर सख्त रुख
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियोजन व्यवस्था कमजोर नहीं होनी चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाएगा।
जनशिकायत निवारण और योजनाएं
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का 100 प्रतिशत क्रियान्वयन जिलों में सुनिश्चित किया जाए।
योजनाएँ केवल फाइलों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखनी चाहिए।
नियमित भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्व के वैकल्पिक स्रोत बढ़ाए जाएँ।
सब्सिडी योजनाओं के आउटकम का मूल्यांकन किया जाए।
नदी-नालों व सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई हो।
एसडीएम, लेखपाल, पटवारी की जवाबदेही तय की जाए।
तहसील स्तर पर भूमि विवाद निस्तारण समितियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो।
अगले 6 माह में विशेष अभियान चलाकर गांवों को 100% योजनाओं से संतृप्त किया जाए।
डिजिटल गवर्नेंस को औपचारिकता नहीं, व्यवहारिक व्यवस्था के रूप में लागू किया जाए।
चारधाम यात्रा को लेकर संयुक्त समीक्षा बैठकें आयोजित हों।
सड़कों के डामरीकरण का कार्य 15 फरवरी से प्रारंभ किया जाए, गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।









