
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जहां एक ओर देशभर के साथ साथ उत्तराखंड में महिलाओं के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं हल्द्वानी में महिलाओं को अपने अधिकारों और सुरक्षा के सवाल पर एकजुट होकर आवाज उठानी पड़ी।
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और प्रगतिशील भोजन माता संगठन के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने अधिकारों, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मांग को जोरदार तरीके से उठाया।
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्धों और अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के दौरान मारे गए 165 मासूम बच्चों, महिलाओं और निर्दोष लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
वक्ताओं ने कहा कि दुनिया भर में युद्ध और हिंसा का सबसे अधिक दुष्प्रभाव आम लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। हाल के समय में साम्राज्यवादियों द्वारा थोपे गए युद्धों में मारे गए मासूम लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त करते हुए कार्यक्रम में “हर जुल्म से लड़ने वाले सब एक हैं” गीत भी गाया गया।
इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें कामगार महिलाओं की स्थिति, उनके अधिकारों और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वक्ताओं ने नई श्रम संहिताओं के तहत महिलाओं से रात्रि पाली में काम करवाने का विरोध करते हुए कहा कि रात की पाली में काम करना महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और बच्चों की देखभाल के लिहाज से अमानवीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें महिलाओं सहित सभी मेहनतकशों के प्रति संवेदनहीन रवैया अपना रही हैं।
सभा में कहा गया कि उत्तराखंड सहित पूरे देश में मेहनतकश महिलाओं की स्थिति अभी भी बेहद कठिन है। कठोर काम, कम मानदेय, असुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न जैसी समस्याएं आज भी बड़ी संख्या में महिलाओं को झेलनी पड़ रही हैं।
भोजनमाताओं से मात्र 3000 रुपये के नाममात्र मानदेय पर माली, सफाई कर्मी, चौकीदार और चपरासी जैसे कई काम करवाए जा रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि सरकारी दावों के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए शौचालय और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी बेहद खराब है।
कार्यक्रम में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मामलों ने पूरे समाज को झकझोर दिया, लेकिन इसके बाद भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ठोस सुधार नहीं दिख रहा है।
हाल ही में देहरादून में एक महिला जज की हत्या और दिनदहाड़े महिलाओं की हत्या की घटनाओं ने भी कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि जब तक महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, सम्मानजनक रोजगार और समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक वास्तविक समानता संभव नहीं है। सरकार से मांग की गई कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सख्त कार्रवाई की जाए, कामगार महिलाओं को सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा दी जाए तथा कार्यस्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित महिलाओं ने संकल्प लिया कि कार्यस्थल, सामंती और घरेलू महिला हिंसा के तीनों रूपों के खिलाफ समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षा के लिए संघर्ष को और मजबूत किया जाएगा। महिलाओं ने यह भी कहा कि वह समाज में न्याय, समानता और शांति की स्थापना के लिए सक्रिय भूमिका निभाती रहेंगी।
कार्यक्रम में समर्थन देने के लिए पछास, क्रालोस और मेडिकल एसोसिएशन के साथी भी मौजूद रहे। प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और भोजनमाता यूनियन से चंपा गिनवाल, बीना देवी, बबीता पांडे, तुलसी देवी, किरण नेगी, धनौली देवी, ममता देवी, परवीन, शहाना, सीता देवी, गंगा देवी मीना, आरती, ममता मेहता, लीला देवी, कुंती, कमला, रजनी, आरती सहित अनेक महिलाएं शामिल रहीं।









