
चम्पावत, प्रेस 15 न्यूज। साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति आपको थोड़ा सा लाभ या कुछ रुपये देकर आपकी बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज ले लेता है, तो समझ लीजिए कि वह आपको कानून के कटघरे में खड़ा करने का चक्रव्यूह रच चुका है। ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम के लेनदेन में किया जाता है।
पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने कहा कि यहां के लोग स्वभाव से शांत होते हैं और आपराधिक प्रवृत्ति के नहीं हैं, इसलिए उन्हें ऐसे नए अपराधों की जानकारी भी कम होती है। लेकिन साइबर अपराधियों के बदलते तरीकों को देखते हुए अब हर व्यक्ति को सावधान हो जाना चाहिए।
उन्होंने अपील की कि कोई भी अपने बैंक खाते, पासबुक या दस्तावेजों की जानकारी किसी को न दे। पिछले कुछ हफ्तों में साइबर ठगी के कई हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।
एसओजी प्रभारी कमलेश भट्ट ने बताया कि अब ठग फर्जी मैसेज भेज रहे हैं, जिन्हें व्हाट्सएप पर खोलते ही फोन का एक्सेस हैकरों के पास चला जाता है और बैंक खाता खाली हो जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें। राष्ट्रीय साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से जीआरएम पोर्टल के माध्यम से धनराशि वापस होने की संभावना रहती है।
उन्होंने बैंक उपभोक्ताओं से अनजान कॉल न उठाने और थोड़े से लालच में किसी को भी अपनी पासबुक व दस्तावेज न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे म्यूल अकाउंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो खाता धारक के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की रिपोर्ट ✍️)











