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चम्पावत, प्रेस 15 न्यूज। मॉडल जिले के दुग्ध उत्पादक अपनी मांगों को लेकर अब आंदोलन के मूड में हैं। उनकी मांग है कि हिमाचल समेत अन्य राज्यों की तर्ज पर दूध का समर्थन मूल्य दिया जाए।
साथ ही दुग्ध समितियों के सचिवों का मेहनताना 50 पैसे से बढ़ाकर 2 रुपये प्रति लीटर किया जाए, पशुओं का सरकारी स्तर पर बीमा कराया जाए और मुख्यमंत्री घस्यारी योजना के तहत मिलने वाले पशु आहार की गुणवत्ता सुधारते हुए उस पर 80 प्रतिशत तथा भूसा व संतुलित पशु आहार पर 60 प्रतिशत सब्सिडी दी जाए।
दुग्ध संघ सचिव यूनियन के जिलाध्यक्ष राजेश बिष्ट ने बताया कि चम्पावत जिले में दुग्ध व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम आधार है, लेकिन हाड़तोड़ मेहनत के बावजूद पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने बताया कि इन मांगों को लेकर 11 सितंबर को जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया था, जिस पर 18 सितंबर को बैठक कर मांगें राज्य सरकार को भेजी गईं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में आंदोलन के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा है।
बिष्ट ने बताया कि जिले में 332 और प्रदेश में 3000 से अधिक दुग्ध समिति सचिव कार्यरत हैं। दूध की खरीद-बिक्री में इनकी अहम भूमिका है, लेकिन ये वेतन पर नहीं, बल्कि कमीशन पर काम करते हैं। उन्हें मिलने वाला 50 पैसे प्रति लीटर का मेहनताना उनकी मेहनत के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरा है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर गौर न किया गया तो 12 नवंबर से बेमियादी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की रिपोर्ट ✍️)











