
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। कभी-कभी किस्मत ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां एक संदिग्ध समझा गया शख्स किसी परिवार की वर्षों जैसी लंबी प्रतीक्षा का अंत बन जाता है। हल्द्वानी में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आर्मी कैंट के प्रतिबंधित क्षेत्र में पकड़ा गया एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक आखिरकार चार महीने बाद अपने परिवार तक पहुंचने वाला है।
सोमवार (13 जुलाई) को राजपुरा स्थित आर्मी कैंट के प्रतिबंधित क्षेत्र में एक युवक दीवार फांदकर अंदर पहुंच गया। सेना के जवानों ने सतर्कता दिखाते हुए उसे रोक लिया और पूछताछ के लिए कोतवाली पहुंचाया।
युवक अपना नाम सिर्फ इरफान बता पा रहा था। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रहा था और यह भी नहीं बता सका कि वह वहां कैसे पहुंचा। इसके बाद उसकी पहचान पता लगाने के प्रयास शुरू हुए। तकनीकी माध्यमों से उसकी पहचान इरफान (36 वर्ष), निवासी ग्राम सिगोही, थाना तुलसीपुर, जनपद बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई।
पहचान होने के बाद जब उसके परिजनों से संपर्क किया गया तो एक बेहद मार्मिक कहानी सामने आई। परिवार ने बताया कि करीब साढ़े तीन से चार महीने पहले वे इरफान का इलाज कराने गोरखपुर गए थे। इलाज के दौरान वह अचानक लापता हो गया था। इसके बाद परिवार ने उसे हर संभव जगह तलाशा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
चार महीने बाद जब हल्द्वानी से उसके जीवित मिलने की सूचना मिली तो परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। जिस बेटे के लौटने की उम्मीद लगभग टूट चुकी थी, उसके मिलने की खबर पूरे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। परिजन अब हल्द्वानी पहुंचकर इरफान को अपने साथ घर ले जाएंगे।
यह सिर्फ एक व्यक्ति के मिलने की खबर नहीं, बल्कि उस उम्मीद की कहानी है जो चार महीने तक बुझी नहीं। एक परिवार का बिछड़ा बेटा आखिरकार अपनों की दहलीज तक लौटने वाला है।









