
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। हल्द्वानी में जिस आयुष्मान आरोग्य मंदिर के शुभारंभ पर मेयर गजराज सिंह बिष्ट समेत जनप्रतिनिधियों और नगर निगम प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं के नए अध्याय की बात कही थी, उसी केंद्र में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की पीड़ा है कि उन्हें तीन महीने से वेतन तक नहीं मिला। अब कर्मचारियों ने कुमाऊं आयुक्त से गुहार लगाई है और उनके शिकायती पत्र ने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़े-बड़े मंच, फीता काटने की तस्वीरें, विकास के दावे और स्वास्थ्य सेवाओं की लंबी-चौड़ी बातें… लेकिन दूसरी ओर उसी आयुष्मान आरोग्य मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों का आरोप है कि वे पिछले तीन महीने (अप्रैल, मई और जून) से बिना वेतन के काम करने को मजबूर हैं।
वाइटल रेडियोलॉजी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों ने कुमाऊं आयुक्त को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि वे नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें तीन माह से वेतन नहीं मिला। कर्मचारियों का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और जरूरी इलाज तक कराना कठिन हो गया है।
आयुक्त दीपक रावत को दिए शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि वेतन मांगने पर मानसिक उत्पीड़न किया जाता है और नौकरी से निकालने की धमकियां दी जाती हैं। कर्मचारियों का दावा है कि उन्होंने पहले भी कंपनी प्रबंधन को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
शिकायत के अनुसार, प्रभावित कर्मचारियों में 10 चिकित्सक, 10 फार्मासिस्ट, 10 स्टाफ नर्स, 10 एमपीडब्ल्यू और 10 सफाई कर्मचारी शामिल हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आयुष्मान आरोग्य मंदिर के शुभारंभ के दौरान मेयर गजराज सिंह बिष्ट और नगर निगम प्रशासन ने इस परियोजना को शहर के लिए बड़ी उपलब्धि बताया था, तब क्या किसी ने यह जानने की कोशिश की कि यहां सेवाएं देने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल रहा है या नहीं?
अब शिकायत सामने आने के बाद कुमाऊं आयुक्त ने नगर आयुक्त को मामले में कार्रवाई कर कर्मचारियों के लंबित वेतन के भुगतान के निर्देश दिए हैं।
प्रेस 15 न्यूज का सवाल: स्वास्थ्य सेवाओं की असली मजबूती सिर्फ इमारतों और उद्घाटनों से नहीं, बल्कि उन डॉक्टरों, नर्सों, फार्मासिस्टों और कर्मचारियों से होती है जो रोज मरीजों की सेवा करते हैं। यदि कर्मचारियों के आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार एजेंसियों और संबंधित कंपनी की जवाबदेही तय होना भी उतना ही जरूरी है, जितना किसी नई योजना का उद्घाटन।









