

हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। किसानों की आमदनी बढ़ाने और स्वरोजगार को मजबूती देने के उद्देश्य से रेशम विभाग द्वारा रेशम कीटपालन को वैज्ञानिक ढंग से अपनाने की अपील की गई है।
रेशम विभाग कुमाऊँ मंडल के उपनिदेशक हेम चंद्र बताते हैं कि यदि किसान निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन करें तो रेशम उत्पादन से बेहतर आमदनी सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि कीटपालन शुरू करने से पहले कीटपालन भवन, ट्रे, रैक, चॉपिंग बोर्ड व अन्य उपकरणों की पूर्ण सफाई और कीटाणुशोधन अत्यंत आवश्यक है। चाकी केंद्र से कीट प्राप्त होते ही उन्हें ट्रे में फैलाकर ताजी और पौष्टिक शहतूत की पत्तियां खिलानी चाहिए। कीटों को प्रतिदिन चार बार—सुबह, दोपहर, शाम और रात्रि निश्चित समय पर आहार देने से उनकी वृद्धि बेहतर होती है।
उपनिदेशक हेम चंद्र ने बताया कि कीटपालन कक्ष का तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस तथा नमी 70 से 80 प्रतिशत बनाए रखना जरूरी है। शहतूत की पत्तियां सुबह या शाम के समय ही तोड़ें और तेज धूप में पत्तियां तोड़ने से बचें। पत्तियों को साफ कपड़े या टाट से ढककर सुरक्षित रखें तथा पीली, सूखी या रोगग्रस्त पत्तियों का उपयोग न करें।
उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी क्षेत्रों से लाई गई पत्तियों को पहले कुछ कीटों को खिलाकर परीक्षण कर लेना चाहिए, ताकि कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से बचा जा सके। कीटों में रोग के लक्षण दिखाई देने पर उन्हें तुरंत अलग कर देना चाहिए और कीटपालन कक्ष में नियमित सफाई बनाए रखनी चाहिए। साथ ही, अनावश्यक लोगों के प्रवेश पर रोक लगाना भी जरूरी है।
मोल्टिंग और कोया निर्माण के दौरान विशेष सावधानी बरतने, समय पर कोया की कटाई, ग्रेडिंग और उचित पैकिंग कर बाजार में विक्रय करने से किसानों को उच्च गुणवत्ता का कोया और बेहतर मूल्य मिल सकता है।
उपनिदेशक (रेशम) कुमाऊं मंडल हेम चंद्र ने कहा कि रेशम की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प है, जिसे अपनाकर वे कम लागत में स्थायी आय अर्जित कर सकते हैं।









