संस्कृत से संस्कार भी, रोजगार भी! उत्तराखंड में आवासीय विद्यालय की उठी मांग

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लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। देवभूमि उत्तराखंड में युवा पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कार देने और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने के उद्देश्य से संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग तेज हो गई है।

संस्कृत विद्वानों का कहना है कि प्रदेश में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर आवासीय संस्कृत विद्यालय खोले जाने चाहिए, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ वैदिक ज्ञान और भारतीय संस्कृति का भी प्रशिक्षण मिले।

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संस्कृत भाषा एवं वेदों के विद्वान डॉ. कीर्ति वल्लभ सकटा ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के एकमात्र श्री बाराही संस्कृत महाविद्यालय, देवीधुरा को लंबे समय से आवासीय विद्यालय बनाए जाने की मांग लंबित है। उनका कहना है कि यदि इस महाविद्यालय को आवासीय स्वरूप दिया जाता है तो इससे प्रदेश ही नहीं, देशभर के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।

डॉ. सकटा के अनुसार वर्तमान समय में युवाओं को भटकाने और समाज में अशांति फैलाने के प्रयास हो रहे हैं। ऐसे दौर में संस्कृत भाषा विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति का भाव विकसित करती है।

उनका कहना है कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कारों की जननी है। संस्कृत का अध्ययन करने वाला छात्र राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानता है और अनुशासित जीवन की ओर अग्रसर होता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं भारतीय संस्कृति और संस्कृत के महत्व को भली-भांति समझते हैं। यदि उत्तराखंड में आवासीय संस्कृत विद्यालय स्थापित किए जाते हैं तो यहां अध्ययन के लिए देश के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थी आएंगे और प्रदेश संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

रोजगार के नए अवसर भी खोलती है संस्कृत

विशेषज्ञों का कहना है कि संस्कृत भाषा का अध्ययन केवल धार्मिक या पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है। संस्कृत के जानकारों के लिए कर्मकांड, ज्योतिष, वेद-पुराण, कथा वाचन, विद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्यापन, सेना एवं अर्धसैनिक बलों में बटालियन पंडित जैसे अनेक रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एवं पूर्व चुनाव आयुक्त डॉ. अनूप पांडे का कहना है कि संस्कृत के विद्वानों की मांग भारत से अधिक विदेशों में है।

वहीं, सनातन धर्म प्रचारक राजी शर्मा का कहना है कि दुनिया के अनेक देशों में संस्कृत भाषा के जानकारों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार संस्कृत का ज्ञान व्यक्ति को सम्मानजनक आजीविका के साथ वैश्विक स्तर पर पहचान भी दिला सकता है।

(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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