
चम्पावत, प्रेस 15 न्यूज। तनाव से राहत पाने के लिए गुटखा और पान मसाला खाने की बढ़ती आदत खासकर युवाओं के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि क्षणिक राहत देने वाला यह नशा धीरे-धीरे शरीर को कई गंभीर बीमारियों, विशेषकर मुंह और गले के कैंसर की ओर धकेल देता है।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह बसेड़ा के अनुसार गुटखे के लगातार सेवन से मुंह के अंदर रेशेदार प्रोटीन (कोलेजन) का असामान्य निर्माण होने लगता है। इससे मुंह की अंदरूनी त्वचा अपनी प्राकृतिक लचक खोकर सफेद और कठोर होने लगती है।
परिणामस्वरूप व्यक्ति को मिर्च-मसाले वाला भोजन खाने में परेशानी होती है और धीरे-धीरे मुंह इतना सिकुड़ सकता है कि केवल तरल पदार्थ ही लेना संभव रह जाता है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय तक गुटखा खाने वालों में मुंह और गले के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा हृदय संबंधी समस्याएं, रक्त संचार में बाधा, पैरों की उंगलियों तक प्रभावित होने की आशंका, आवाज में बदलाव और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है।
ऐसे छुड़ाई जा सकती है गुटखे की लत
डॉ. बसेड़ा का कहना है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से गुटखे की लत पर काबू पाया जा सकता है। उनके अनुसार गुटखा छोड़ने के दौरान तलब लगने पर लौंग, इलायची या काली मिर्च मुंह में रखी जा सकती है। इसके अलावा अदरक के छोटे टुकड़ों को नींबू के रस में भिगोकर उन पर काला नमक लगाकर सुखा लें। तलब लगने पर एक-एक टुकड़ा चूसने से गुटखा खाने की इच्छा कम करने में मदद मिल सकती है।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)








