
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। समाज में रौब जमाने और खुद को खास साबित करने की यूं तो कई बिमारियां हैं। कोई कैसे तो कैसे सामने वाले को प्रभाव में लेने से नहीं चूकता। ऐसे ही एक बीमारी को आजकल “शस्त्र लाइसेंस” के नाम से भी प्रचलित है, उस पर नैनीताल जिला प्रशासन ने करारा प्रहार किया है।
डीएम कोर्ट में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना नाहिद कुरैशी को महंगा पड़ गया। हल्द्वानी के आज़ाद नगर, थाना बनभूलपुरा निवासी नाहिद कुरैशी पुत्र वाजिद कुरैशी का शस्त्र लाइसेंस जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के आदेश पर निरस्त कर दिया गया है।
इस प्रकरण ने एक बार फिर उजागर कर दिया है कि कैसे कुछ लोग शस्त्र लाइसेंस को सुरक्षा की आवश्यकता नहीं, बल्कि समाज में डर और दबदबा कायम करने का औजार समझ बैठे हैं। अदालत के समक्ष खुद को “नकद कारोबार करने वाला बड़ा व्यापारी” बताकर जान-माल के कथित खतरे का हवाला दिया गया, लेकिन यह तर्क जांच की कसौटी पर आते ही धराशायी हो गया।
प्रशासन द्वारा कराई गई पड़ताल में आयकर रिटर्न से साफ हुआ कि संबंधित व्यक्ति की वार्षिक आय ₹5,78,600 है और कर अदायगी मात्र ₹13,000
यह तथ्य अपने आप में उस पूरे दावे की पोल खोलने के लिए काफी था, जिसके आधार पर शस्त्र लाइसेंस को जायज़ ठहराने की कोशिश की गई थी। सवाल सीधा है। इतनी सीमित आय में कौन-सा असाधारण खतरा, और किस आधार पर हथियार रखने की मजबूरी?
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय नैनीताल ने इस मामले में दो टूक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि शस्त्र लाइसेंस कोई स्टेटस सिंबल नहीं है और न ही इसे झूठे डर के सहारे जीवित रखा जा सकता है। कोर्ट ने इसे नियमों का दुरुपयोग मानते हुए लाइसेंस निरस्त करने का सख़्त फैसला सुनाया।
यह निर्णय केवल एक व्यक्ति का लाइसेंस रद्द करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी के लिए चेतावनी है जो हथियार लेकर समाज में “भौकाल” बनाने का सपना पाल रहे हैं। प्रशासन का संदेश साफ है जहां वास्तविक खतरा नहीं, वहां शस्त्र नहीं। आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और सख़्ती तय मानी जा रही है।
इससे पहले डीएम ने बलोट रिसॉर्ट, सूर्यजाला निवासी विकास किरौला का शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया था। विकास के पिता और भाई ने अपनी जान माल का खतरा बताया था।









