
नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल का कहर तीन जिंदगियां लील चुका है, जबकि सैकड़ों ग्रामीण अब भी बीमारी की जद में हैं। घर-घर दहशत है, लोग सहमे हुए हैं और साफ पानी के लिए सिस्टम की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
सवाल यह है कि आखिर तीन मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के बाद जिम्मेदारों की नींद क्यों टूटी? अब उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद जल संस्थान ने आनन-फानन में पेयजल और सीवरेज शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं। यानी जिस व्यवस्था को पहले ही जाग जाना चाहिए था, उसे अब अदालत की फटकार ने जगाया है।
माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा 08 सितम्बर 2026 को दिए गए निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड जल संस्थान की शाखा नैनीताल के अंतर्गत नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विभिन्न शिकायत निवारण केन्द्र (कंट्रोल रूम) स्थापित किए गए हैं।
इस संबंध में जानकारी देते हुए अधिशासी अभियन्ता, उत्तराखण्ड जल संस्थान, नैनीताल अनीश पिल्लई ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल अथवा सीवरेज व्यवस्था से संबंधित किसी भी शिकायत की सूचना संबंधित शिकायत निवारण केन्द्र (कंट्रोल रूम) के साथ-साथ सहायक अभियन्ता, अपर सहायक अभियन्ता, कनिष्ठ अभियन्ता अथवा अधिशासी अभियन्ता को दी जा सकती है।
नैनीताल नगर क्षेत्र के लिए
कंट्रोल रूम: शाखा नैनीताल मुख्य पम्पहाउस, मल्लीताल (पेयजल)
दूरभाष: 05942-235097विभागीय टोल-फ्री नंबर: 18001804100
अंशुल ओझा, सहायक अभियन्ता: 8209993096
चेतन कुमार, अपर सहायक अभियन्ता: 9720527721
गजेन्द्र सिंह गड़िया, कनिष्ठ अभियन्ता (उपनल): 7351703933
ज्योलीकोट क्षेत्र के लिए
दूरभाष: 9456590727
अनिल परिहार (नौकुचियाताल) भीमताल, सहायक अभियन्ता: 9456590727
मोहन सिंह रावत, सहायक अभियन्ता: 9411117309
रविंद्र, अपर सहायक अभियन्ता: 7055012605
इसके अतिरिक्त शाखा नैनीताल के अंतर्गत 8630505740 मोबाइल नंबर पर पेयजल एवं सीवरेज संबंधी शिकायत कॉल अथवा व्हाट्सऐप पर वीडियो के माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है।
शिकायत ई-मेल आईडी [email protected] पर भी भेजी जा सकती है।
जल संस्थान की ओर से प्रभावित क्षेत्रों के उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि पेयजल अथवा सीवरेज से संबंधित किसी भी समस्या की सूचना उपलब्ध कराए गए संपर्क माध्यमों के जरिए विभाग तक पहुंचाएं, ताकि शिकायतों का निस्तारण किया जा सके और पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा जा सके।









