हल्द्वानी के चंदन हॉस्पिटल से भगवान बचाए! बंधक बना ली गरीब की लाश (Video)

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हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज के पास स्थित चन्दन हॉस्पिटल पर आरोप है कि इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद अतिरिक्त पैसे जमा न करने पर मृतका का शव देने से इनकार कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया।

03 जनवरी 2026 की रात अल्मोड़ा जिले के गोलना करड़िया धारानौला निवासी नन्दन बिरौड़िया ने एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टीसी को फोन कर अपनी पीड़ा बताई।

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सुनिए मानवता को शर्मसार करने वाले हल्द्वानी के चंदन हॉस्पिटल की करतूत (Video)🔴👇

पीड़ित के अनुसार, उनकी पत्नी सीमा बिरौड़िया को बेस अस्पताल अल्मोड़ा से रेफर कर चन्दन हॉस्पिटल, हल्द्वानी लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

परिजनों का आरोप है कि इलाज के नाम पर पहले ही ₹57,000 जमा करा लिए गए। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने ₹30,000 और जमा करने की मांग की।

पैसे न देने पर शव सौंपने से इनकार कर दिया गया। गरीब परिवार के सामने न तो पैसे थे और न ही धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करने का अधिकार।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर पुलिस अस्पताल पहुंची। इसके बाद मृतका का शव परिजनों को सौंपा गया। मृत्यु प्रमाण पत्र भी दिलाया गया। अस्पताल प्रबंधन को भविष्य में ऐसा न करने की हिदायत दी गई।

यह मामला केवल अल्मोड़ा के एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर चल रही मनमानी और वसूली की संस्कृति को उजागर करता है।

क्या इलाज के बाद भी शव पाने के लिए पैसे देना जरूरी है? गरीब मरीजों के लिए क्या प्राइवेट अस्पताल सिर्फ कमाई का जरिया हैं? क्या स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों पर कभी स्वतः संज्ञान लेगा?

चौंकाने वाली बात यह है कि इसी चन्दन हॉस्पिटल का उद्घाटन उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत द्वारा किया गया था।

अब सवाल यह है कि क्या मंत्री और स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर जवाबदेही तय करेंगे? या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दब जाएगा?

यह घटना निजी अस्पतालों के उस काले चेहरे को सामने लाती है, जहां पहले इलाज, फिर बिल, और अंत में लाश तक को सौदेबाजी का जरिया बना दिया जाता है।

अब जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग और सरकार ऐसे अस्पतालों पर सख़्त कार्रवाई करे, ताकि किसी और परिवार को अपनों की देह पाने के लिए दर-दर की ठोकर न खानी पड़े।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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