
कोटाबाग, प्रेस 15 न्यूज। नैनीताल जिले के कोटाबाग क्षेत्र से सामने आई यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि ऑनलाइन सट्टा गेमिंग के खतरनाक जाल में फंसती युवा पीढ़ी की हकीकत भी बयां करती है।
मोबाइल पर खेला जाने वाला एक “ऑनलाइन गेम” कब जिंदगी के लिए जानलेवा साबित हो जाए, यह कालाढूंगी की इस घटना ने साफ कर दिया। आसान पैसे के लालच में शुरू हुआ सट्टा, दबाव और प्रताड़ना के चलते 17 वर्षीय छात्र को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर गया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
कोटाबाग क्षेत्र में ऑनलाइन सट्टा गेमिंग के चलते सरपंच के 17 वर्षीय बेटे ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान जगदीश बिष्ट के रूप में हुई है, जो गांव के सरपंच धन सिंह बिष्ट का पुत्र था और कोटाबाग के पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र था।
पुलिस के अनुसार, जगदीश का अपने कुछ दोस्तों के साथ ऑनलाइन सट्टा को लेकर पैसों का विवाद चल रहा था। पिता धन सिंह बिष्ट के अनुसार, उनका बेटा सट्टा खेलने के चक्कर में फंस गया था और एक दोस्त उसे लगातार खेलने के लिए उकसा रहा था। पैसे हारने के बाद वही दोस्त उस पर मानसिक दबाव बना रहा था।
आरोप है कि उक्त दोस्त द्वारा उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, यहां तक कि मारपीट और जान से मारने की धमकी भी दी गई। मरने से पहले जगदीश ने एक वीडियो भी बनाया, जिसमें उसने अपने दोस्त पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
घटना वाले दिन सुबह जगदीश घर से वाशरूम जाने की बात कहकर निकला, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटा। जब परिजनों ने उसकी तलाश की, तो वह रास्ते में बेहोशी की हालत में मिला। परिजन उसे तत्काल स्वास्थ्य केंद्र कोटाबाग ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों कहना है कि अस्पताल में भी जगदीश ने अपने एक दोस्त द्वारा दी जा रही धमकियों और उत्पीड़न की जानकारी दी थी। मृतक के पिता धन सिंह बिष्ट ने अभय गुप्ता नामक युवक पर लगातार परेशान करने का आरोप लगाया है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की बात कही है। फिलहाल वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों को खंगाल रही है।
कोटाबाग की यह घटना एक कड़वा सच सामने लाती है ऑनलाइन सट्टा गेमिंग अब सिर्फ खेल नहीं, बल्कि युवाओं की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। समय रहते सतर्कता और जागरूकता ही ऐसे हादसों को रोक सकती है।
ऑनलाइन सट्टा गेमिंग: युवाओं के लिए खतरनाक जाल
आसान पैसे का लालच देकर युवाओं को फंसाया जाता है।
हार के बाद कर्ज और मानसिक दबाव तेजी से बढ़ता है।
दोस्तों या गिरोह द्वारा धमकी और ब्लैकमेलिंग के मामले बढ़ रहे हैं।
तनाव, अवसाद और आत्मघाती प्रवृत्ति तक स्थिति पहुंच जाती है।
माता-पिता के लिए चेतावनी
बच्चों की मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें।
व्यवहार में बदलाव, तनाव या चुप्पी को हल्के में न लें।
बच्चों से खुलकर बात करें और भरोसे का माहौल बनाएं।
पैसों के लेन-देन और दोस्तों की संगत पर ध्यान दें।









