CBSC 12th Result: नंबर नहीं, जिंदगी बड़ी है: एक रिजल्ट ने काशीपुर में बुझा दिया घर का इकलौता चिराग

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काशीपुर, प्रेस 15 न्यूज। अंकों की अंधी दौड़ में आज का समाज शायद यह भूलता जा रहा है कि परीक्षा का परिणाम किसी बच्चे की पूरी जिंदगी का फैसला नहीं होता।

प्रतियोगिता और अपेक्षाओं के बढ़ते दबाव के बीच कई बच्चे असफलता को अंत मान बैठते हैं, जबकि जीवन हर हार के बाद नए अवसर देता है।

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मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि परीक्षा में असफलता से ज्यादा खतरनाक वह अकेलापन और डर होता है, जिसमें बच्चा खुद को परिवार और समाज के सामने असफल समझने लगता है। ऐसे समय में जरूरत बच्चों को डांटने की नहीं, बल्कि उन्हें यह भरोसा दिलाने की होती है कि उनका जीवन किसी मार्कशीट से कहीं अधिक कीमती है।

काशीपुर में सीबीएसई परीक्षा परिणाम आने के कुछ ही घंटों बाद एक छात्र द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की घटना ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अपने बच्चों को सफलता का दबाव तो दे रहे हैं, लेकिन असफलता से लड़ना नहीं सिखा पा रहे

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की इंटरमीडिएट परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने से टूटे छात्र ने फांसी लगाकर जीवन खत्म कर लिया। छात्र पूर्व पालिकाध्यक्ष अरविंद कुमार चौधरी का इकलौता बेटा था। बेटे की मौत के बाद परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। बुधवार देर शाम तक मृतक के घर पर पुलिस व आसपास के लोगों का जमावड़ा रहा।

महुवाखेड़ागंज निवासी पूर्व पालिकाध्यक्ष अरविंद कुमार चौधरी का बेटा 18 वर्षीय द्रोण चौधरी काशीपुर के हेरीटेज स्कूल में 12वीं का छात्र था।

बुधवार दोपहर सीबीएसई का परिणाम घोषित होने के बाद द्रोण ने वेबसाइट पर अपना रिजल्ट देखा, जिसमें वह अनुत्तीर्ण था। बताया जा रहा है कि इससे वह काफी आहत हो गया। इसके बाद उसने घर के परिसर में बने बाथरूम में रस्सी का फंदा डालकर आत्महत्या कर ली।

पुलिस के अनुसार उस समय उसकी मां सीमा चौधरी घर के कमरे में सो रही थीं। कुछ देर बाद जब वह बाथरूम की ओर गईं तो द्रोण को फंदे से लटका देख उनके होश उड़ गए। आनन-फानन में उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही बाजार गए पिता अरविंद कुमार चौधरी भी अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल से सूचना मिलने पर पुलिस और सीओ टीम भी मौके पर पहुंची। द्रोण की बड़ी बहन दिल्ली में पढ़ाई करती है।

इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। वहीं, यह मामला अभिभावकों और समाज के सामने भी बड़ा सवाल छोड़ गया है कि बच्चों पर बढ़ता मानसिक दबाव आखिर किस दिशा में ले जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के दौरान बच्चों से लगातार संवाद, भावनात्मक सहयोग और असफलता को सामान्य रूप में स्वीकार करने की सीख देना आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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