
भीमताल, प्रेस 15 न्यूज। हौसलों की पतवार थामी है, लहरों से डरती नहीं जो ठान ले कुछ कर गुजरने की, वो महिला हारती नहीं…जहां अब तक पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था, वहां आज एक महिला आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की पतवार थामे पर्यटकों का दिल जीत रही है।
भीमताल में इतिहास रचते हुए पहली बार एक महिला अपनी नाव से पर्यटकों को झील की सैर करा रही है।खास बात यह है कि पर्यटक भी पूरे उत्साह के साथ उनके साथ झील भ्रमण करना पसंद कर रहे हैं।
हमने महिलाओं को टैक्सी, टैम्पो, रिक्शा चलाते, बसों में कंडक्टर और ड्राइवर की जिम्मेदारी निभाते तो देखा ही है, लेकिन भीमताल की झील पर यह नज़ारा पहली बार देखने को मिल रहा है। यूं तो महिलाएं शौकिया नाव चलाती रही हैं, मगर अब रोजगार और सम्मान के लिए नाव चलाना अपने आप में एक नई मिसाल है।
गीता बिष्ट: हिम्मत की पहचान
गीता बिष्ट नाम की इस मातृशक्ति ने परिवार को सहारा देने के लिए नौकायन को स्वरोजगार के रूप में चुना। रोजाना घर की जिम्मेदारियां निभाने के बाद वह भीमताल झील पहुंचती हैं और अपनी चप्पू वाली नाव लेकर पर्यटकों को घुमाने के लिए अपनी बारी का इंतजार करती हैं।
गीता न सिर्फ पर्यटकों को झील की सैर कराती हैं, बल्कि भीमताल से जुड़ी लोककथाएं, अनसुने किस्से और झील के राज भी बड़े रोचक अंदाज में सुनाती हैं। यही वजह है कि उनकी नाव में बैठने वाले पर्यटक खुद को खास महसूस करते हैं।
पर्यटकों को भी भाया महिला नाविक का सफर
गीता बिष्ट की नाव से झील का चक्कर लगाने के बाद पर्यटक विनोद सिरोही बेहद खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की यह महिला बेहद हिम्मती और जुझारू है। जहां कई पुरुष गलत रास्तों में उलझे रहते हैं, वहीं महिलाएं चुनौतीपूर्ण काम कर सम्मानजनक आजीविका कमा रही हैं। गीता ने हमें बहुत अच्छे तरीके से घुमाया और भीमताल की जानकारी भी दी।
महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल
गीता बिष्ट आज सिर्फ एक नाविक नहीं, बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो हालातों से हार मान लेती हैं। भीमताल की झील पर उनकी नाव यह संदेश दे रही है कि अगर हौसला मजबूत हो, तो कोई भी काम छोटा नहीं होता।
यह कहानी सिर्फ झील की सैर नहीं, आत्मनिर्भर भारत और नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है।
(वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट)









