
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। हल्द्वानी समेत कुमाऊं क्षेत्र में इन दिनों ब्याज माफिया का जाल तेजी से फैलता नजर आ रहा है। अवैध साहूकारी के जरिए लोगों से मनमाना ब्याज वसूलना, दबाव बनाना और यहां तक कि जमीन तक हड़प लेने जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे आम लोगों का सुख-चैन छिनता जा रहा है।
इसी गंभीर मुद्दे को लेकर कुमाऊं आयुक्त/सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने जनसुनवाई के दौरान साफ संदेश दिया कि अनरजिस्टर्ड लोगों से कर्ज लेना खतरनाक है और केवल अधिकृत बैंक या वित्तीय संस्थानों से ही ऋण लेना चाहिए।
मंगलवार को हल्द्वानी स्थित कैम्प कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में आयुक्त ने न सिर्फ नई शिकायतें सुनीं बल्कि पूर्व शिविरों में लंबित मामलों पर भी संबंधित अधिकारियों को तलब कर मौके पर समाधान कराया।
आयुक्त ने भूमि संबंधी मामलों में स्पष्ट कहा कि किसी भी संपत्ति की खरीद-बिक्री में नकद लेनदेन से बचें और भुगतान बैंक के माध्यम से ही करें, क्योंकि बैंक रिकॉर्ड ही सबसे मजबूत साक्ष्य होता है।
जनसुनवाई में कालाढूंगी निवासी कविता बाल्मिकी ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उन्होंने सफाई कर्मचारी अमित नामक व्यक्ति से 1.50 लाख रुपये उधार लिए थे और ब्याज सहित करीब 2.50 लाख रुपये वापस भी कर दिए। बावजूद इसके आरोपी ने उनकी जमीन अपने नाम दर्ज कर बेच दी। चूंकि भुगतान नकद किया गया था, उसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने संबंधित को 2 लाख रुपये वापस करने के निर्देश दिए, जिस पर आरोपी ने एक माह में धनराशि लौटाने और भविष्य में ब्याज का काम न करने की बात कही।
इसके अलावा गीता नेगी ने भूमि खरीद के बावजूद रजिस्ट्री न होने की शिकायत की, जिस पर आयुक्त ने डीलर और भू-स्वामी को 5 मई तक रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि अवहेलना पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कुमारी खष्टी देवी ने पिता की मृत्यु के बाद पेंशन न मिलने की समस्या रखी, जिस पर मुख्य चिकित्साधिकारी और कोषाधिकारी को तत्काल तलब कर शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
वहीं, बनभूलपुरा निवासी मोहम्मद जाहिद ने बिना आवेदन के उनके नाम पर 80 हजार रूपए का लोन स्वीकृत होने की शिकायत की। इस पर आयुक्त ने बैंक अधिकारियों को बुलाकर तत्काल समाधान के निर्देश दिए।
राजप्रीत कौर ने पारिवारिक भूमि बंटवारे में गड़बड़ी का मामला उठाया, जिस पर संबंधित पटवारी को खतौनी में नामों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए।
जनसुनवाई के दौरान आयुक्त ने एक बार फिर दोहराया कि अवैध साहूकारों से दूरी बनाएं, क्योंकि यह न सिर्फ आर्थिक शोषण का कारण बनते हैं बल्कि कई मामलों में लोगों को उनकी जमीन-जायदाद से भी हाथ धोना पड़ रहा है।









