
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। मकान बेचने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी, धमकी और सोशल मीडिया के जरिए बदनाम करने के चर्चित मामले में नैनीताल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि प्रकाश की अदालत ने शनिवार को ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। अदालत ने इस बहुचर्चित प्रकरण में छह आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
अदालत ने मुख्य आरोपी गौरव गुप्ता और उसके भाई सौरभ गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषसिद्ध पाते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और 85-85 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अन्य सह-आरोपियों को भी उनकी भूमिका के अनुसार कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया है।
35 लाख लेकर न मकान दिया, न पैसा लौटाया
अदालती अभिलेखों के अनुसार, हल्द्वानी निवासी कवयित्री गौरी मिश्रा से आरोपियों ने 40 लाख रुपये में मकान बेचने का सौदा किया था। इस सौदे के तहत पीड़िता ने 35 लाख रुपये नकद व चेक के माध्यम से आरोपियों को दे दिए, लेकिन न तो मकान की रजिस्ट्री कराई गई और न ही धनराशि लौटाई गई।
जब पीड़िता ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने धमकी देना शुरू कर दिया और उसे सोशल मीडिया के माध्यम से बदनाम करने की साजिश रची।
30 लाख के चेक दिए, सभी हुए बाउंस
धनराशि लौटाने का झांसा देते हुए मुख्य आरोपी गौरव गुप्ता ने 30 लाख रुपये के छह चेक पीड़िता को दिए, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद पीड़िता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
मामले की जांच के दौरान साइबर अपराध से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आने पर पुलिस ने पूरक आरोपपत्र दाखिल किया और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं। दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया।
अलग-अलग धाराओं में कड़ी सजाएं
अदालत ने गौरव गुप्ता और सौरभ गुप्ता को धारा 420 के तहत 7-7 वर्ष, धारा 506 के तहत 5-5 वर्ष, धारा 509 के तहत 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास सुनाया। बताते चलें कि हत्या के मामले में दोनों गुप्ता भाई वर्तमान में जेल की सजा काट रहे हैं।
वहीं शत्रुघ्न पांडे उर्फ डिंपल पांडे को आईटी एक्ट व आईपीसी की धाराओं में कुल 9 वर्ष का सश्रम कारावास और 1.60 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया।
अन्य आरोपी ललित मोहन पांडे, लीलाधर उर्फ लीला कांडपाल और मुकेश चंद्र भट्ट को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा दी गई।
जेल भेजने के आदेश
अदालत ने सभी दोषियों के खिलाफ सजायावी वारंट जारी करते हुए उन्हें जिला उपकारागार हल्द्वानी भेजने के निर्देश दिए।
“सच की जीत हुई” – गौरी मिश्रा
फैसले के बाद पीड़िता कवयित्री गौरी मिश्रा ने कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था।
उन्होंने कहा कि आठ साल पहले मुझसे मकान दिलाने के नाम पर 35 लाख रुपये ठग लिए गए। जब पैसे वापस मांगे तो जान से मारने की धमकी दी गई और अश्लील फोटो वायरल करने की कोशिश की गई। आज अदालत के फैसले ने साबित कर दिया कि सच की हमेशा जीत होती है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन सभी पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण है, जो ठगी, धमकी और मानसिक उत्पीड़न के बावजूद न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।









