
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। हल्द्वानी में तहसील न हुई काले कारनामों की गढ़ हो गई। यहां कभी अरायजनवीस घर से 143 की फाइलें निपटाता पकड़ा जाता है तो कभी तहसीलदार, एसडीएम तक को जाने वाली ऊपरी कमाई के स्वर फूटते नजर आते हैं। कुल मिलाकर हल्द्वानी तहसील न हुई यहां आम आदमी की चप्पलें घिसवाने और भ्रष्ट्राचार का तंत्र हावी है।
सोमवार को पूर्वाह्न जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने तहसील हल्द्वानी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तहसीलदार/नायब तहसीलदार न्यायालय से संबद्ध भू-राजस्व अभिलेखों के कक्ष में दो प्राइवेट व्यक्ति पाए गए, जो आम नागरिकों से पब्लिक डीलिंग करते हुए न्यायालयीन फाइलों पर कार्य कर रहे थे।
Video देखें हल्द्वानी तहसील में कोर्ट के दस्तावेज असुरक्षित 🔴👇
चौंकाने वाली बात यह रही कि उक्त कक्ष में कोई भी अधिकृत सरकारी अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था, जबकि न्यायालयीन अभिलेख अनधिकृत व्यक्तियों की खुली पहुंच में पाए गए।
इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यह घटना न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितता, सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा में बड़ी चूक तथा न्यायालयीन प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप का स्पष्ट संकेत देती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), जनपद नैनीताल को निर्देशित किया है कि वे इस प्रकरण की विस्तृत, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच करें। जांच के दौरान निम्न बिंदुओं की विशेष रूप से पड़ताल की जाएगी।
न्यायालय कक्ष में पाए गए दोनों प्राइवेट व्यक्तियों की पहचान एवं पृष्ठभूमि
उनकी उपस्थिति का कानूनी आधार या अनुमति
किन-किन भू-राजस्व प्रकरणों में उनके द्वारा पब्लिक डीलिंग की गई
न्यायालय कक्ष व अभिलेखों तक उनकी अनधिकृत पहुंच कैसे बनी
उस समय सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण
क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें कार्य करने की अनुमति या संरक्षण दिया।
अनधिकृत डीलिंग से किसी पक्ष को अनुचित लाभ या क्षति
सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा, गोपनीयता और न्यायालयीन मर्यादा के उल्लंघन
प्रकरण में विभागीय, दंडात्मक अथवा आपराधिक कार्यवाही की आवश्यकता
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जांच के दौरान आवश्यक होने पर सभी संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं तथा अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जाएं।
यदि जांच में प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य सामने आता है, तो उसका स्पष्ट उल्लेख जांच प्रतिवेदन में किया जाए। जांच रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।









