
देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि देहरादून में बन रही देश की पांचवीं साइंस सिटी का प्रदेशभर के स्कूली विद्यार्थियों को नियमित भ्रमण कराया जाएगा, ताकि बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि, वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित हो सके।
मुख्यमंत्री आई.आर.डी.टी. सभागार में पायनियर समाचार पत्र समूह और उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “Mainstreaming Science, Technology and Innovation for a Prosperous Uttarakhand” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर आधारित होगी। अब समय आ गया है कि विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं और किताबों तक सीमित न रखकर आम लोगों के जीवन और विकास से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया की ताकत प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नई तकनीकों से तय हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक तकनीकें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। इन क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें आधुनिक संसाधन, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है। इसी उद्देश्य से सरकार शिक्षण संस्थानों, वैज्ञानिक संस्थाओं और उद्योग जगत के साथ मिलकर नवाचार आधारित विकास मॉडल पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन में विज्ञान और तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, नेशनल क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे अभियान भारत को वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की है। इसका उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है। उन्होंने कहा कि देहरादून में बन रही देश की पांचवीं साइंस सिटी उत्तराखंड को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि साइंस सिटी के निर्माण के बाद प्रदेश के सभी जिलों के स्कूली विद्यार्थियों का नियमित भ्रमण कराया जाए, ताकि वे आधुनिक विज्ञान और नई तकनीकों को करीब से समझ सकें। उनका कहना था कि इससे भविष्य के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नवाचारकर्ता तैयार करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि राज्य में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, जीआईएस आधारित डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर, स्टेम लैब्स, एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, प्री-इन्क्यूबेशन लैब्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय अवसर मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य देवभूमि उत्तराखंड को वीरभूमि, खेलभूमि के साथ-साथ विज्ञान और नवाचार की भूमि के रूप में भी वैश्विक पहचान दिलाना है। उन्होंने वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे विज्ञान और तकनीक को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर और समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।









