
नैनीताल प्रेस 15 न्यूज। उच्च न्यायालय ने प्रदेश के धार्मिक स्थलों, बुग्यालों और ग्लेशियरों में जाने वाले पर्वतारोहियों या श्रद्धालुओं द्वारा ले जाए जा रहे सिंगल यूज प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओ से पर्यावरण नुकसान संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की।
वरिष्ठ न्यायमूर्ती मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ती पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी समस्त मांगों को लेकर चीफ सेक्रेटरी(मुख्य सचिव)को प्रत्यावेदन देने को कहा।
न्यायालय ने मुख्य सचिव से उसपर विचार करने को भी कहा है। खंडपीठ ने जनहित याचिका को इससे जुड़े मामले के साथ जोड़ दिया है।
मामले के अनुसार, पर्यावरणविद, समाजसेवी और पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा कि उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों, बुग्यालों और ग्लेशियरों में जाने वाले पर्यटकों और श्रदालुओं द्वारा अपने साथ खाने की प्लास्टिक में बंद सामग्री लेजाकर कचरा फैलाया जा रहा है। जिसके चलते प्रदेश के जंगलों व धार्मिक स्थलों सहित ग्लेशियरों के साथ ही नदियों, नालों में प्लास्टिक का कचरा जमा हो गया है। इस कचरे से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
याचिका में कहा गया है धार्मिक स्थलों में भंडारा कराने वाले लोगों या बुग्यालों में जाने वाले पर्यटकों की निगरानी के लिए अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति की जाए जो यह सुनिश्चित करे कि जो भी यात्री या ट्रैकर अपने साथ पानी की बोतलें व अन्य खाने पीने का सामान साथ लेकर जा रहे हैं वो उसके खाली पैकेटों को अपने साथ वापस लेकर आए। नहीं लाने पर जुर्माना लगाया जाए।
याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि भण्डारा, शादी विवाह व अन्य आयोजनो में भारी मात्रा में प्लास्टिक के ग्लास, प्लेट, बोतलें और अन्य का उपयोग किया जाता है। आयोजन समाप्त होने के बाद ये कचरा वहीं बिखरा पड़ा रहता है।
आयोजन कराने वाली संस्थाओं से इसको साफ कराने के लिए बांड भरवाने की भी मांग की है, जिसमें उनके द्वारा कूड़ा साफ करने की शर्त का उल्लेख हो, ऐसा न करने पर उनपर जुर्माना लगाया जाए। इस जुर्माने का उपयोग कचरा हटाने वालों को दिया जाए।
(नैनीताल से वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती की रिपोर्ट)









