
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। हल्द्वानी में जीएमएफएक्स ग्लोबल लिमिटेड का मामला सिर्फ एक कंपनी या एक CEO की कहानी नहीं है। यह उस लालच, लापरवाही और अंधविश्वास की कहानी भी है, जिसमें फंसकर आम आदमी बार-बार ठगा जाता है।
सवाल यह है कि क्या 25 महीनों में पैसा डबल होना सच में संभव है अगर होता, तो बैंक, LIC, पोस्ट ऑफिस और सरकारें इतनी मामूली ब्याज दरों पर क्यों चलतीं?
GMFX Global जैसे मामलों में अक्सर उंगली सिर्फ ठगों पर उठती है—और उठनी भी चाहिए। लेकिन क्या जनता की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?
बिना कंपनी का रजिस्ट्रेशन देखे, बिना नियम-कानून समझे, सिर्फ “पैसा डबल” सुनकर निवेश करना—क्या यह समझदारी है?
एक और बड़ा सवाल कई पीड़ित महीनों से पुलिस के चक्कर काट रहे थे, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या तब तक इंतजार किया जाता रहेगा, जब तक मामला करोड़ों तक न पहुंच जाए?
हर बार ठग नए नाम, नई स्कीम और नए चेहरे के साथ आते हैं, लेकिन लालच वही पुराना रहता है। और जब स्कीम डूबती है, तो वही लोग सबसे पहले सिस्टम को कोसते हैं।
आज कमिश्नर दीपक रावत की सख्ती से कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन असली सवाल यह है क्या हम अगली ठगी से सबक लेंगे? या फिर अगली “पैसा डबल” स्कीम का इंतजार करेंगे?
अब वक्त है तय करने का सिर्फ कानून पर भरोसा करेंगे या खुद भी समझदारी दिखाएंगे? क्योंकि सच यही है ठग अकेले नहीं लूटते, अंधा लालच भी लुटवाता है।
अब ठगी की ये पूरी खबर भी जानिए जिसका भंडाफोड़ आज हल्द्वानी में हुआ है।
पैसा डबल करने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाली जीएमएफएक्स ग्लोबल लिमिटेड पर आखिरकार प्रशासन का शिकंजा कस गया है। कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत ने कंपनी के CEO बिमल रावत के खिलाफ सुसंगत धाराओं में तत्काल मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

कुसुमखेड़ा निवासी एक पीड़ित ने मंडलायुक्त से शिकायत करते हुए बताया कि कंपनी द्वारा निवेश के नाम पर पैसा लिया गया, लेकिन तय समय बीतने के बावजूद न तो रकम लौटाई गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया गया।
पीड़ितों का आरोप है कि वे लंबे समय से पुलिस थानों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही थी। आज जाकर प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाया गया।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त ने कंपनी के CEO को कार्यालय में तलब किया, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्रशासनिक अमले के साथ सतलोक कॉलोनी, फेज-6, रणवीर गार्डन के पास स्थित कंपनी कार्यालय पर छापेमारी की गई।
छापेमारी के दौरान मंडलायुक्त ने कंपनी के दस्तावेज, लेन-देन का रिकॉर्ड और बैलेंस शीट प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन CEO बिमल रावत कोई भी दस्तावेज या ऑनलाइन डेटा दिखाने में असफल रहे। इसी दौरान 10–11 और पीड़ित मौके पर पहुंचे, जिन्होंने अपनी जमा धनराशि वापस दिलाने की मांग की।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के नाम पर निवेश करने के बजाय CEO द्वारा व्यक्तिगत रूप से दो स्थानों पर जमीन खरीदी गई, जिसे उन्होंने स्वयं स्वीकार किया। कंपनी पर करीब 3900 लोगों की देनदारी होना भी सामने आया है।
बैंक खातों की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कंपनी के IDFC बैंक खाते में मात्र 42,455 रुपये और HDFC बैंक खाते में करीब 50 हजार रुपये की राशि पाई गई, जबकि 25 महीनों में पैसा डबल करने का लालच देकर लगभग 8 हजार लोगों से 39 करोड़ रुपये वसूले गए। कंपनी द्वारा मीडिएटर्स को इंसेंटिव देकर मल्टीलेवल मार्केटिंग/पिरामिड स्कीम के रूप में काम किया जा रहा था।
मामले को गंभीर मानते हुए मंडलायुक्त ने मल्टीलेवल मार्केटिंग व पिरामिड स्कीम्स, कंपनी एक्ट के उल्लंघन, कंपनी फंड से व्यक्तिगत संपत्ति बनाने, पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर तत्काल FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
मंडलायुक्त ने स्पष्ट कहा कि जनता का एक-एक पैसा लौटाया जाएगा और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
इस कार्रवाई के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल चौहान, वित्त नियंत्रक सूर्य प्रताप सिंह, बड़ी संख्या में निवेशक व पीड़ित मौजूद रहे।









