
भवाली, प्रेस 15 न्यूज। कैंची धाम आश्रम से जुड़ी सोशल मीडिया, यूट्यूब चैनलों और कुछ न्यूज़ पोर्टलों पर प्रसारित की जा रही भ्रामक और गलत जानकारियों के बीच अब ट्रस्ट अधिवक्ता के माध्यम से तथ्यों के साथ सामने आया है।
करीब 50 वर्ष पुराने कैंचीं धाम ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी सभी गतिविधियां पूरी तरह कानूनी, पारदर्शी और सरकारी निगरानी में संचालित होती हैं।
कैंचीं धाम ट्रस्ट के अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने मीडिया के माध्यम से ट्रस्ट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि कैंचीं धाम को चैरिटेबल एंडोमेंट एक्ट 1890 के अंतर्गत वर्ष 1974 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा ट्रस्ट के नाम संपत्तियां हस्तांतरित की गई थीं। इसके बाद 6 मार्च 1974 को संपत्ति का गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार ट्रस्ट में समय-समय पर सदस्य बदलते रहते हैं और अब तक 13 ट्रस्टी नियुक्त किए जा चुके हैं। ट्रस्ट का सरकार द्वारा प्रतिवर्ष ऑडिट कराया जाता है, जो 31 मार्च 2024 तक पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट द्वारा आयकर रिटर्न भी नियमित रूप से दाखिल किया जाता है।
अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने यह भी बताया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती पूरी पारदर्शिता के साथ की जाती है। इस प्रक्रिया में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकृत टीम कैंची धाम ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर धनराशि की गिनती करती है और उसे सुरक्षित रूप से बैंक में जमा कराया जाता है।
उन्होंने कहा कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, न्यूज़ पोर्टल और चैनल बिना किसी पुष्टि के झूठी और भ्रामक खबरें प्रसारित कर रहे हैं, जो न केवल ट्रस्ट की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं बल्कि न्यायालय में लंबित मामले को भी प्रभावित कर सकती हैं। अधिवक्ता ने सभी मीडिया माध्यमों से अपील की कि वे तथ्यहीन खबरें चलाकर उच्च न्यायालय की अवमानना न करें।
उल्लेखनीय है कि पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला ने कैंचीं धाम में कथित वित्तीय अनियमितता और आसपास अतिक्रमण के आरोप लगाते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। न्यायालय ने इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।
इस बीच कुछ न्यूज पोर्टलों, यूट्यूबरों और सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा कैंची धाम की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से नकारात्मक और भ्रामक खबरें प्रसारित की जाने लगीं। इन्हीं परिस्थितियों के बीच आज ट्रस्ट अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने मीडिया के सामने आकर कैंची धाम से जुड़ा पूरा सच रखा। मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को प्रस्तावित है।
(वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)









