
देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल दून मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का एक और खौफनाक मंजर सामने आया है। ओपीडी भवन की लिफ्ट अचानक बीच में फंस जाने के कारण 12 लोग करीब 20 मिनट तक अंधेरे और घुटन के बीच खौफ से जूझते रहे। प्रबंधन की इस भारी चूक ने अस्पताल के ‘इमरजेंसी बैकअप’ दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
सुबह करीब 10:30 बजे जब ओपीडी मरीजों और तीमारदारों से खचाखच भरी थी, तभी अचानक बिजली गुल हो गई। नियमतः ऑटोमैटिक जनरेटर को चंद सेकंड में शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण मशीन ‘डेड’ पड़ी रही। बिजली जाते ही लिफ्ट फ्लोर के बीच में अटक गई और उसमें सवार लोग अंदर ही कैद हो गए।
लिफ्ट के भीतर फंसे लोग घबराहट में लगातार बटन दबाते रहे और बाहर निकालने की गुहार लगाते रहे, लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं था।
तकनीकी कर्मचारी मुख्य बिल्डिंग को छोड़कर पुरानी मोर्चरी के पास शेड बनाने में व्यस्त थे। सूचना मिलने के बाद भी कर्मचारियों को ओपीडी पहुंचने में 12 मिनट लग गए।
जब जनरेटर ने काम नहीं किया, तो कर्मचारियों ने उसे मैनुअल तरीके से शुरू किया और ‘हैंग’ हो चुकी लिफ्ट को विशेष प्रक्रिया से खोलकर लोगों को बाहर निकाला।
हैरानी की बात यह है कि दून अस्पताल की लिफ्ट में लोगों का फंसना अब आम बात हो गई है। बार-बार होती इन घटनाओं के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
अब अस्पताल प्रबंधन लिफ्ट ऑपरेटर के जवाब-तलब और जांच की बात कर रहा है। भविष्य में ऐसी तकनीकी खामी न आए, इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? आखिर क्यों करोड़ों के बजट के बावजूद अस्पताल का ऑटोमैटिक पावर सिस्टम फेल हो गया?









