
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। क्या सच में जंगलों में आग लगाने से बरसात में हरी-भरी घास उगती है, या यह सिर्फ एक खतरनाक भ्रम है? हर साल गर्मियों में धधकते जंगल और राख में तब्दील होती हरियाली के बीच यह सवाल फिर खड़ा हो जाता है।
पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पन्त ने इस सोच को न केवल गलत बल्कि बेहद नुकसानदेह बताते हुए साफ चेतावनी दी है कि जंगल में आग लगाना अपराध ही नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ किया गया घोर पाप है।
जंगलों में आग लगाने की बढ़ती घटनाओं और उससे हो रहे पर्यावरणीय नुकसान को लेकर पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पन्त ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जंगल में आग लगाना न केवल दंडनीय अपराध है, बल्कि यह एक घोर पाप भी है, जिससे प्रकृति और जीव-जंतुओं को अपूरणीय क्षति पहुंचती है।
उन्होंने कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि आग लगाने से बरसात में अच्छी घास उगती है। हर साल लाखों पेड़ और पशु-पक्षी जंगल की आग में भस्म हो जाते हैं, जिससे करोड़ों की वन संपदा का नुकसान होता है और पारिस्थितिक तंत्र बुरी तरह प्रभावित होता है।
डॉ. पन्त के अनुसार, वनाग्नि के पीछे कई कारण हैं, जिनमें वन माफियाओं द्वारा अवैध कटान के सबूत मिटाने के लिए आग लगाना एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा कुछ अराजक तत्व भी जानबूझकर ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं, जो अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रचलित उस सोच को गलत बताया, जिसमें घास के लिए जंगल में आग लगाई जाती है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि यदि बीज जल जाएंगे तो अंकुरण कैसे होगा। हरेला पर्व का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जैसे भुने हुए बीज अंकुरित नहीं हो सकते, वैसे ही आग से नष्ट हुए बीजों से घास उगना संभव नहीं है।
डॉ. पन्त ने समझाया कि जंगलों में घास के बीज और जड़ें पहले से मौजूद रहती हैं, जो बरसात में स्वाभाविक रूप से अंकुरित होती हैं। आग लगने के बाद जो घास उगती है, वह उन बीजों से होती है जो आग से प्रभावित नहीं हुए या बाहर से आए होते हैं।
उन्होंने वनाग्नि के दुष्प्रभावों का जिक्र करते हुए कहा कि आग में न केवल पेड़-पौधे बल्कि असंख्य पशु-पक्षी, कीट-पतंगे और सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं। कई जानवर अपने बच्चों को बचाने के प्रयास में स्वयं जल जाते हैं, जबकि पेड़-पौधे अपनी पीड़ा व्यक्त भी नहीं कर पाते।
उन्होंने आमजन से अपील की कि वे इस तरह की भ्रांतियों में न पड़ें और जंगलों को सुरक्षित रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। यदि कहीं आग लगती दिखे या कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचना दें।
अंत में उन्होंने कहा कि हर नागरिक में कर्तव्यबोध जागृत होना जरूरी है, क्योंकि जंगल हमारे हैं और उनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है।









