
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। “समाज, स्वच्छता एवं सतत विकास लक्ष्यः एक समाजशास्त्रीय चिंतन” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ मंगलवार सुबह सीडीएस जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में हुआ।
समाजशास्त्र विभाग, समाज विज्ञान विद्याशाखा, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी द्वारा आयोजित संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्वानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी की संयोजक प्रो. रेनू प्रकाश, निदेशक, समाज विज्ञान विद्याशाखा एवं समन्वयक, समाजशास्त्र विभाग, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने स्वागत उद्बोधन में संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य स्वच्छता और सतत विकास से जुड़े सामाजिक आयामों पर गहन अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है। यह संगोष्ठी सैद्धांतिक समझ को विकसित करने के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान के विकास में सहायक होगी।
उद्घाटन सत्र में विशिष्ट वक्ता प्रो. इन्दु पाठक (पूर्व विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र, डीएसबी परिसर, नैनीताल) ने अपने वक्तव्य में कहा कि समाजशास्त्रीय दृष्टि से स्वच्छता का संबंध सामाजिक संरचना, सामाजिक मूल्यों और सामुदायिक सहभागिता से गहराई से जुड़ा हुआ है। हमें स्वच्छता की संस्कृति को जानना होगा तभी हम इसके विकास की ओर बढ़ सकते हैं। उन्होंने स्वच्छता के विभिन्न आयामों पर चर्चा करी।
इसी क्रम में प्रो. आराधना शुक्ला (पूर्व विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान, एमएमजे परिसर, अल्मोड़ा) ने स्वच्छता और मानव व्यवहार के मनोवैज्ञानिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वच्छता की आदतें सामाजिक परिवेश और शिक्षा के माध्यम से विकसित होती हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को ही विकास का मूल न माना जाए पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखकर ही उसके विकास में सहभागिता की जाए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. जेपी पचौरी, पूर्व कुलपति, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, देहरादून ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्वच्छता और सतत् विकास आज वैश्विक विमर्श के प्रमुख विषय बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में पारंपरिक जीवन मूल्यों तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इन लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने अपने उद्बोधन में सामाजिक संस्कृति के माध्यम से विभिन्न पक्षों को रखा।
मुख्य वक्ता प्रो. जेके पुण्डीर, पूर्व प्रति कुलपति, सीसीएस विश्वविद्यालय मेरठ ने कहा कि स्वच्छता केवल भौतिक पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, मानसिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को इस दिशा में शोध एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देने की बात करी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के मा. कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी जी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत व्यवहार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सामूहिक उत्तरदायित्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि समाज की संरचना, व्यवहार और संस्कृति को समझे बिना स्वच्छता एवं विकास के लक्ष्यों को स्थायी रूप से प्राप्त नहीं किया जा सकता। सतत विकास लक्ष्य केवल नीतिगत विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही सफल हो सकता है। स्वच्छता हमें ईश्वरी अनुभूति का ज्ञान कराती है।
इस अवसर पर इस संगोष्ठी की स्मारिका का भी विमोचन किया गया था। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नागेंद्र गंगोला ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. डिगर सिंह फर्सवान द्वारा प्रस्तुत किया गया।
उद्घाटन सत्र के बाद पहले दिन संगोष्ठी में चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए विद्वानों और शोधार्थियों द्वारा 34 से अधिक शोधपत्रों का वाचन किया गया। इन शोधपत्रों में समाज, स्वच्छता एवं सतत् विकास लक्ष्य से संबंधित विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस संगोष्ठी के माध्यम से विद्वानों एवं शोधार्थियों के मध्य सार्थक शैक्षणिक संवाद स्थापित हुआ तथा स्वच्छता एवं सतत् विकास के लक्ष्यों को समझने और आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण विचार सामने आए। विश्वविद्यालय के आचार्यों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से यह संगोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशकगण, प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी तथा कार्यक्रम सचिव डॉ. भावना डोभाल, डॉ. गोपाल सिंह गौनिया, शैलजा, डॉ. किशोर कुमार, डॉ.सीता, प्रो. मंजरी अग्रवाल, डॉ. घनश्याम जोशी, डॉ. शशांक शुक्ल, प्रो. सोमेश कुमार, प्रो. आशुतोष भट्ट, डॉ. नीरजा सिंह, डॉ. नीरज जोशी, श्री हिमांशु पुनेठा, डॉ. लता जोशी, डॉ. द्विजेश उपाध्याय, डॉ रंजू जोशी पांडे, डॉ आशीष टम्टा, डॉ. शालिनी चौधरी, डॉ. नमीता वर्मा, डॉ.जगमोहन परगांई, विकास जोशी, ऋतंभरा नैनवाल, राजेश आर्या, मोहित रावत, रेनू भट्ट, ज्योति, नवीन जोशी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।









