धरती के सच्चे सिपाही: पौधों से हरियाली, सेवा से सम्मान तक हल्द्वानी के डॉ. आशुतोष पंत का प्रेरक सफर

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हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। जब कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ, बिना किसी आर्थिक सहारे के सिर्फ समाज और प्रकृति के लिए काम करता है, तो उसका हर प्रयास अपने आप में एक मिसाल बन जाता है। ऐसे ही एक सच्चे पर्यावरण प्रहरी हैं डॉ. आशुतोष पंत, जिनकी मेहनत और समर्पण को अब राज्य स्तर पर सम्मान मिला है।

30 अप्रैल 2026 को हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के 13 समाजसेवियों को विशिष्ट सेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. आशुतोष पंत को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

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डॉ. पंत का यह सफर केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या का परिणाम है। अपने स्वर्गीय पिता सुशील चंद्र पंत की प्रेरणा से शुरू किए गए इस मिशन में उन्होंने अब तक 4 लाख 65 हजार पौधे निःशुल्क वितरित किए, 14 छोटे संघन वन विकसित किए और 6 छोटे जलाशयों का निर्माण कराया। खास बात यह है कि उन्होंने यह सब कार्य बिना किसी NGO, सरकारी सहायता या व्यक्तिगत आर्थिक सहयोग के किया।

उनके इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत समाज का सहयोग रहा है। गांव-गांव में उनके साथ खड़े रहने वाले मित्र, पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित करने वाले लोग और अपनी जमीन पर पौधों को लगाकर उनका संरक्षण करने वाले पर्यावरण प्रेमी इन सभी की भूमिका को वे अपनी सफलता का असली आधार मानते हैं।

डॉ. पंत का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और संवर्धन ही असली जिम्मेदारी है। यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। समाज से मिले प्रेम और सम्मान को वे अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

उन्होंने इस सम्मान के लिए सभी शुभचिंतकों, सहयोगियों और विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष नवीन वर्मा तथा भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके कार्यों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया।

आने वाले समय में भी उनका संकल्प अडिग है। जुलाई में हरेला पर्व से एक बार फिर वे बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान शुरू करने जा रहे हैं और उन्होंने समाज से सहयोग की अपील की है।

डॉ. आशुतोष पंत जैसे लोग यह साबित करते हैं कि यदि इरादे मजबूत हों, तो एक अकेला व्यक्ति भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। उनका यह सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शन भी है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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