
अल्मोड़ा, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड के लोकप्रिय कुमाऊंनी लोकगायक दीवान सिंह कनवाल (65) का बुधवार तड़के निधन हो गया। उन्होंने अल्मोड़ा के खत्याड़ी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही कुमाऊंनी लोकसंगीत जगत और क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
मधुर आवाज और लोकधुनों के लिए पहचाने जाने वाले दीवान सिंह कनवाल ने अपने गीतों के माध्यम से पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन को नई पहचान दी। उनके गीत बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की जुबान पर रहते थे। अपने सुरों से उन्होंने कुमाऊं की लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखा और लोकसंगीत को जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
लोकसंगीत के साथ-साथ दीवान सिंह कनवाल एक सशक्त रंगकर्मी भी थे। उन्होंने अल्मोड़ा के प्रसिद्ध हुक्का क्लब की रामलीला में कई यादगार किरदार निभाए। मंच पर उनकी अदाकारी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थी और उनके निभाए किरदार आज भी अल्मोड़ा के लोगों की स्मृतियों में बसे हुए हैं।
दीवान सिंह कनवाल वर्ष 2021 में जिला सहकारी बैंक अल्मोड़ा से सीनियर ब्रांच मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने स्वयं को पूरी तरह कुमाऊंनी लोकगीतों के सृजन और संरक्षण के कार्य में समर्पित कर दिया था।
उनके निधन की खबर मिलते ही अल्मोड़ा में गहरा शोक और स्तब्धता का माहौल है। सांस्कृतिक, सामाजिक और कलात्मक जगत से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने उनके आवास पर पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनका अंतिम संस्कार अल्मोड़ा के बेतालेश्वर घाट में किया जाएगा।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसिद्ध लोक कलाकार दीवान सिंह कनवाल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि दीवान कनवाल ने उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और लोकसंगीत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।









