
हल्द्वानी/अल्मोड़ा, प्रेस 15 न्यूज।उत्तराखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत को संजोने की दिशा में एक सराहनीय पहल के तहत बुधवार को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने अल्मोड़ा निवासी डॉ. ललित मोहन जोशी की होली गीतों की पुस्तक ‘बरसत रंग फुहार’ का विमोचन किया। इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे प्रयास समय की आवश्यकता है।
कुलपति प्रो. लोहनी ने कहा कि होली जैसे लोकपर्व पर इस पुस्तक का प्रकाशन सभी होल्यारों और संगीत प्रेमियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने यह भी कहा कि बसंत पंचमी से होली की शुरुआत हो चुकी है और ऐसे समय में इस तरह की पुस्तक का आना होली गीतों की शुद्धता और मौलिकता को बनाए रखने में सहायक होगा।
पुस्तक ‘बरसत रंग फुहार’ में कुल 100 पारंपरिक होली गीतों का संग्रह किया गया है। ये सभी होलियां वर्षों से गायी जाती रही हैं। लेखक द्वारा गीतों के पदों में आई शब्द अशुद्धियों को ठीक करने, साथ ही समय के साथ लुप्त हो चुके अंतरों और पदों को खोजकर पुनः प्रस्तुत करने का गंभीर प्रयास किया गया है।
डॉ. ललित मोहन जोशी ने बताया कि होली गीतों में प्रचलित अपभ्रंश शब्दों को उनके मूल रूप से जोड़ने का प्रयास पुस्तक की विशेषता है। इसके साथ ही पुस्तक में ब्रज की होली को कुमाऊंनी भावों के साथ पिरोया गया है, जिससे यह संग्रह और भी समृद्ध बन गया है।
लेखक ने इस पुस्तक को महिला होल्यारों को समर्पित किया है। उनका कहना है कि घर-घर बैठकी होली गाने वाली महिलाएं ही इन गीतों की असली संवाहक हैं। अपभ्रंश हुए शब्दों को शुद्ध रूप में गाने और लुप्त हो रहे पदों को जीवित रखने में महिला बैठकी होलियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है।
कुलपति प्रो. लोहनी ने कहा कि होली गीतों की शुद्धता और परंपरा का संरक्षण बेहद आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी लोक-संस्कृति से जुड़ी रह सकें।









