
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। मुखानी नहर कवरिंग रोड पर 14 वर्षीय किशोर की जान जाने वाले हादसे के बाद मंगलवार को निरीक्षण के लिए पहुंचे कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के वाहन को ही एक नशे में धुत ई-रिक्शा चालक ने टक्कर मार दी।
हैरानी की बात यह कि टक्कर के वक्त कमिश्नर वाहन में ही मौजूद थे। मौके पर तैनात पुलिस ने चालक को हिरासत में लिया, और देखते ही देखते वहां भीड़ जमा हो गई।
यह कोई सामान्य घटना नहीं, यह चेतावनी है। हल्द्वानी शहर तेजी से नशेड़ियों का गढ़ बनता जा रहा है। शहर की सड़कों पर कौन शराब, चरस या स्मैक के नशे में झूमता हुआ वाहन चला रहा है, किसी को पता नहीं। सोचिए जब कमिश्नर का वाहन सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक की जान की कीमत क्या रह जाती है?
सवाल साफ हैं कि क्या महीने दो महीने में कुछ ग्राम चरस, स्मैक और कच्ची पक्की शराब पकड़ने तक ही पुलिस का गुड वर्क सीमित रहेगा?
ई-रिक्शा और सार्वजनिक वाहनों की नियमित जांच क्यों नहीं? क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही प्रशासन जागेगा? क्या महीने दो महीने में कुछ ग्राम चरस, स्मैक और कच्ची पक्की शराब पकड़ने तक ही पुलिस सीमित रहेगी?
इन सवालों का जवाब कमिश्नर दीपक रावत के वाहन में शराबी चालक की टक्कर की घटना के बाद तो सामने आने ही चाहिए।









