बीएसएफ एकेडमी ग्वालियर में पासिंग आउट परेड की सलामी, हल्द्वानी के लाल असिस्टेंट कमांडेंट भूपेंद्र चिलवाल पर सबको गर्व

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हल्द्वानी, संजय पाठक। हर युवा का सपना बड़ा होता है, लेकिन कुछ सपनों में सिर्फ सफलता नहीं, देशसेवा की पुकार होती है। ऐसे ही सपने को जीकर साकार किया है हल्द्वानी के फतेहपुर निवासी भूपेंद्र चिलवाल ने। 52 सप्ताह की कठोर, अनुशासित और साहसिक ट्रेनिंग पूरी कर जब वे असिस्टेंट कमांडेंट बने, तो यह केवल एक नियुक्ति नहीं थी यह उस जज्बे की जीत थी, जो अपने से पहले देश को रखता है।

ग्वालियर स्थित बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में आयोजित पासिंग आउट परेड के दिन परेड ग्राउंड पर कदमताल करते भूपेंद्र के साथ मानो पूरे हल्द्वानी का आत्मविश्वास चल रहा था। 68 पुरुष और 3 महिला प्रशिक्षु अधिकारियों के बीच उनकी मौजूदगी खास इसलिए भी थी, क्योंकि उनके पीछे वर्षों की मेहनत, परिवार का त्याग और देश के लिए कुछ कर दिखाने की दृढ़ इच्छा खड़ी थी।

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पासिंग आउट परेड के दौरान असिस्टेंट कमांडेंट भूपेंद्र चिलवाल  के कंधों में सितारे लगाते वक्त पिता गोपाल सिंह चिलवाल और मां रेखा चिलवाल की आंखें खुशी और गर्व से भर आईं। प्रेस 15 न्यूज 

उस पल की सबसे सुंदर तस्वीर दर्शक दीर्घा में थी जहाँ बैठे माता-पिता की आंखें गर्व से भर आईं। यह खुशी शब्दों में नहीं, खामोशी में महसूस होती है। बहन प्रतिभा बताती हैं कि इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने परिवार के 11 सदस्य हल्द्वानी से ग्वालियर पहुंचे थे। सबके चेहरों पर वही भाव “हमारा बेटा देश के काम आ रहा है।”

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इस गरिमामयी परेड में बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया। बाइक शो और डॉग शो ने बीएसएफ के शौर्य, संतुलन और सतर्कता का जीवंत परिचय दिया वही गुण, जिनकी कसौटी पर भूपेंद्र जैसे युवा खरे उतरे हैं।

भूपेंद्र चिलवाल कहते हैं कि 52 सप्ताह की ट्रेनिंग ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया। बॉर्डर मैनेजमेंट ड्यूटीज पर फोकस के साथ हर परिस्थिति में निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई। “आज से मेरे जीवन में देशसेवा का नया अध्याय शुरू हुआ है,” उनके शब्दों में आत्मविश्वास भी है और विनम्रता भी।

देखें वीडियो: यूं हीं कोई भूपेंद्र चिलवाल नहीं बन जाता🇮🇳🙏

अब उनकी पहली तैनाती त्रिपुरा में है जहां वे सीमाओं की सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएंगे। पिता गोपाल सिंह चिलवाल, माता रेखा चिलवाल, बहन प्रतिभा, जीजाजी रघु बोहरा, ताऊजी कुंवर सिंह, चाचा गंगा सिंह, आनंद सिंह, भाई यशवंत और पूरन सबके लिए यह सिर्फ खुशी नहीं, एक जीवन भर का गर्व है।

भूपेंद्र चिलवाल की कहानी आज के युवाओं को यह सिखाती है कि साधारण पृष्ठभूमि भी असाधारण ऊंचाइयों तक ले जा सकती है बशर्ते इरादे सच्चे हों, मेहनत निरंतर हो और लक्ष्य देशसेवा जैसा बड़ा हो। यह कहानी बताती है कि वर्दी सिर्फ पहनावा नहीं, एक जिम्मेदारी है और कुछ युवा इसे सम्मान की तरह ओढ़ते हैं।

हल्द्वानी का यह बेटा आज प्रेरणा है। कल जब कोई युवा सपनों और संदेह के बीच खड़ा होगा, तो भूपेंद्र चिलवाल की कहानी उसे कहेगी चलो, देश बुला रहा है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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