रामनगर: उम्र बढ़ती गई, सेवा का जुनून नहीं थमा… अब ‘रामायणी सम्मान’ से नवाजे जाएंगे योगेश्वर देवरानी

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रामनगर, प्रेस 15 न्यूज। शिक्षा, प्रशासन, समाजसेवा और लोक-संस्कृति के क्षेत्र में छह दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहकर अपनी अलग पहचान बनाने वाले रामनगर निवासी वरिष्ठ नागरिक योगेश्वर प्रसाद देवरानी को प्रतिष्ठित ‘रामायणी सम्मान’ से नवाजा जाएगा। यह सम्मान उन्हें 19 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी में आयोजित समारोह में रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से प्रदान किया जाएगा।

देशभर से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों के चयन में इस वर्ष योगेश्वर प्रसाद देवरानी का नाम भी शामिल किया गया है। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन में शिक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय योगदान रहा है।

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प्रधानाध्यापक से उप शिक्षा निदेशक तक का सफर

योगेश्वर प्रसाद देवरानी ने वर्ष 1962 में राजकीय हाई स्कूल नैनीसैन, चमोली में प्रधानाध्यापक के रूप में अपनी शैक्षणिक सेवा शुरू की। वर्ष 1979 तक उन्होंने नैनीसैन के साथ राजकीय हाई स्कूल सिमली और राजकीय इंटर कॉलेज कर्णप्रयाग में भी प्रधानाचार्य के रूप में सेवाएं दीं।

इसके बाद 1979 से 1989 तक पौड़ी और चमोली गढ़वाल में जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्य किया। वर्ष 1989 से 1991 तक वे जिला विद्यालय निरीक्षक, जालौन रहे। इसके बाद 1991 से 1993 तक शिक्षा निदेशालय, इलाहाबाद में उप शिक्षा निदेशक के पद पर सेवाएं दीं और 30 सितंबर 1993 को सेवानिवृत्त हुए।

रामलीला और लोक संस्कृति से रहा गहरा जुड़ाव

शैक्षणिक और प्रशासनिक दायित्वों के साथ देवरानी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी निरंतर सक्रिय रहे। वे भारत स्काउट एवं गाइड से लंबे समय तक जुड़े रहे और मंडलीय सचिव से लेकर जिला कमिश्नर तथा स्टेट चीफ कमिश्नर, हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड, उत्तरांचल जैसे दायित्व संभाले।

पौड़ी गढ़वाल की रामलीला समिति के अध्यक्ष के रूप में वर्ष 1980 से 1988 तक उन्होंने रामलीला के आयोजन और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा चमोली के डिमर, सिमली और कर्णप्रयाग में रामलीला आयोजनों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

श्रीनगर वैकुंठ चतुर्दशी मेला, ज्वाल्पा देवी नवरात्रि मेला, सल्ड महादेव मकर संक्रांति मेला और गौचर मेला सहित विभिन्न आयोजनों में उन्होंने संयोजक की भूमिका निभाई। पौड़ी, गोपेश्वर और जोशीमठ के शरदोत्सव से भी उनका जुड़ाव रहा।

13 पुस्तकों के लेखक, साहित्य से भी गहरा नाता

योगेश्वर प्रसाद देवरानी का साहित्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान है। उनकी 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे पर्वतीय सभा, रामनगर के संरक्षक और आजीवन सदस्य भी हैं।

वर्ष 1982-83 में जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान पौड़ी जनपद ने उत्तर प्रदेश के प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम में प्रथम स्थान हासिल किया था।

‘रामायणी सम्मान’ से जुड़े प्रयास भी खास

रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से दिए जाने वाले इस सम्मान के पीछे रामायण और श्रीराम से जुड़े शोध एवं दस्तावेजीकरण का व्यापक प्रयास भी है। संस्था ने अयोध्या में प्रभु श्री रामलला के मंदिर संघर्ष की यात्रा पर आधारित 1250 पृष्ठों का ग्रंथ ‘राम लला: मन से मंदिर तक’ तैयार किया है।

संस्था के अनुसार, वर्ष 2018 से छह वर्षों के प्रयासों के बाद तैयार इस ग्रंथ का अंग्रेजी सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में रूपांतरण किया जा रहा है, ताकि इसे दुनिया के प्रमुख पुस्तकालयों तक पहुंचाया जा सके।

शिक्षा से समाजसेवा और संस्कृति से साहित्य तक छह दशक से अधिक की सक्रिय यात्रा के लिए योगेश्वर प्रसाद देवरानी को मिलने वाला यह सम्मान रामनगर के लिए भी गौरव का अवसर है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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