
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। जेल गए, बाहर आए और फिर नशे के इंजेक्शन खपाने लगे! क्या ये चार चेहरे उस बड़े नेटवर्क की सिर्फ छोटी कड़ियां हैं, जिसका असली सरगना अब भी बेखौफ है?
शहर में नशे का कारोबार किस गहराई तक अपनी जड़ें जमा चुका है, इसकी एक और तस्वीर सामने आई है। बनभूलपुरा पुलिस ने चेकिंग के दौरान गौला रोखड़, जवाहर नगर क्षेत्र से 25 नशीले इंजेक्शनों के साथ चार युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक चारों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट समेत अलग-अलग मामलों में पहले से मुकदमे दर्ज हैं।
ऐसे में सवाल सिर्फ 25 इंजेक्शनों की बरामदगी का नहीं है, बल्कि यह है कि आखिर हल्द्वानी में नशे का वह नेटवर्क कब टूटेगा, जो बार-बार नए चेहरों के जरिए युवाओं तक जहर पहुंचा रहा है?
पुलिस ने समीर मो. चांद, जुबैर खान, मो. जावेद और फरमान अली को गिरफ्तार किया है। चारों की उम्र 22 से 26 वर्ष के बीच है। पुलिस के अनुसार इनके कब्जे से कुल 25 नशीले इंजेक्शन बरामद हुए हैं। मामले में थाना बनभूलपुरा में एफआईआर संख्या 130/2026, धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
हैरानी सिर्फ गिरफ्तारी की नहीं, इनके पुराने रिकॉर्ड की भी है। इस मामले को गंभीर बनाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार चारों आरोपियों में से प्रत्येक का कोई न कोई आपराधिक इतिहास सामने आया है।
समीर मो. चांद पुत्र सफीक अहमद, निवासी वार्ड नंबर 24, लाइन नंबर 17, थाना बनभूलपुरा, नैनीताल, उम्र 25 वर्ष के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में एफआईआर संख्या 21/2024 दर्ज है। इसमें आर्म्स एक्ट, भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं, किशोर न्याय अधिनियम तथा यूएपीए समेत कई गंभीर धाराएं शामिल हैं।
जुबैर खान पुत्र पुतन, निवासी वार्ड नंबर 24, गफूर बस्ती, थाना बनभूलपुरा, नैनीताल, उम्र 25 वर्ष के खिलाफ पुलिस के अनुसार तीन मामले पहले दर्ज हैं—एफआईआर संख्या 179/2024, 42/2025 और 153/2025, जिनमें एनडीपीएस एक्ट की धाराएं शामिल हैं।
मो. जावेद पुत्र मो. याकूब, निवासी वार्ड नंबर 24, गफूर बस्ती, थाना बनभूलपुरा, नैनीताल, उम्र 26 वर्ष के खिलाफ एफआईआर संख्या 09/2020 और 20/2026 में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है।
वहीं फरमान अली पुत्र सगीर, निवासी गफूर बस्ती, वार्ड नंबर 24, थाना बनभूलपुरा, नैनीताल, उम्र 22 वर्ष के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में एफआईआर संख्या 106/2025, थाना किच्छा, जनपद ऊधमसिंह नगर में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है।
जेल से बाहर आने के बाद फिर वही रास्ता?
इन मामलों का सबसे चिंताजनक पहलू यही है कि यदि कोई व्यक्ति पहले भी नशे से जुड़े मामलों में पकड़ा जा चुका है और फिर उसी तरह के आरोप में दोबारा गिरफ्तार होता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं रह जाता। यह उस व्यवस्था और नेटवर्क पर भी सवाल खड़ा करता है, जो उसे दोबारा उसी धंधे में लौटने का मौका देता है।
क्या गिरफ्तार किए गए ये चार युवक ही नशे के पूरे कारोबार का चेहरा हैं? या फिर इनके पीछे कोई ऐसा नेटवर्क है, जो युवाओं को आगे करके खुद पर्दे के पीछे सुरक्षित बैठा है?
अगर ये सिर्फ कड़ियां हैं तो उस पूरी श्रृंखला तक पुलिस और जांच एजेंसियां कब पहुंचेंगी? नशे के इंजेक्शन आखिर इनके हाथों तक पहुंचते कहां से हैं? और उन लोगों तक कब पहुंचेगा कानून का हाथ, जो इस जहर की सप्लाई कर रहे हैं?
यही वे सवाल हैं जिनका जवाब हल्द्वानी के अभिभावक जानना चाहते हैं।
मां-बाप के दर्द को कौन समझेगा?
नशे की सबसे बड़ी कीमत केवल वह युवक नहीं चुकाता जो इसकी गिरफ्त में आता है। उसके साथ पूरा परिवार टूटता है।
जिस मां ने बेटे को गोद में लेकर उसके उज्ज्वल भविष्य के सपने देखे होंगे, जिस पिता ने उसकी पढ़ाई और नौकरी के लिए अपनी जरूरतें तक टाली होंगी, वही मां-बाप जब अपने बच्चे को चरस, स्मैक या नशीले इंजेक्शनों की गिरफ्त में देखते हैं तो उनके लिए इससे बड़ा दुख शायद ही कोई हो।
हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे कितने परिवार होंगे, जो हर दिन यही प्रार्थना करते होंगे कि उनके बच्चों तक नशा पहुंचाने वाले हाथ खत्म हों और नशे के कारोबार को संरक्षण देने वालों पर भी कानून का शिकंजा कसे।
यह सिर्फ पुलिस की कार्रवाई का विषय नहीं है। यह पूरे समाज के भविष्य का सवाल है।
नशे के खिलाफ लड़ाई घर से भी शुरू करनी होगी
नशे के बढ़ते खतरे के बीच एक बार फिर परवरिश और संस्कारों की भूमिका सामने आती है। बच्चों को सिर्फ जन्म देना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें समय देना, उनकी संगत पर नजर रखना, उनकी परेशानियों को समझना और उन्हें सही-गलत का फर्क समझाना भी उतना ही जरूरी है।
हर बच्चा अपराधी पैदा नहीं होता। परिस्थितियां, संगत, लालच और नशे का आसान उपलब्ध होना उसे उस रास्ते पर धकेल सकते हैं। इसलिए परिवार, स्कूल, समाज और प्रशासन—सभी को मिलकर इस लड़ाई को लड़ना होगा।
पुलिस की गिरफ्त में आए ये चार युवक अगर पहले भी कानून की कार्रवाई झेल चुके हैं और फिर नशे के कारोबार के आरोप में पकड़े गए हैं, तो यह मामला केवल 25 इंजेक्शनों की बरामदगी तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
जांच उस स्रोत तक पहुंचनी चाहिए जहां से नशा निकलता है, उस नेटवर्क तक पहुंचनी चाहिए जो इसे हल्द्वानी तक लाता है और उन बड़े चेहरों तक पहुंचनी चाहिए जो युवाओं के भविष्य का सौदा कर रहे हैं।
क्योंकि छोटी मछलियां पकड़कर तालाब साफ नहीं होगा। असली लड़ाई उस पूरे नेटवर्क से है, जो नशे को बाजार देता है और हमारी नई पीढ़ी से उसका भविष्य छीन रहा है।
हल्द्वानी के मां-बाप आज यही चाहते हैं कि नशा बेचने वाले हाथों पर ऐसी चोट हो कि किसी घर का चिराग फिर न बुझे।









