
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। एक शक ने पहले रिश्ते में दरार डाली, फिर गुस्सा बढ़ा और आखिरकार एक जिंदगी खत्म होने का आरोप सामने आया।
बनभूलपुरा के जवाहर नगर की यह घटना सिर्फ हत्या का मामला नहीं, बल्कि हर रिश्ते के लिए एक गंभीर चेतावनी है शक हो तो बात कीजिए, भरोसा टूटे तो संवाद कीजिए, लेकिन गुस्से और हिंसा को कभी रास्ता मत बनने दीजिए।
रिश्तों में शक की एक चिंगारी कब नफरत और हिंसा की आग बन जाए, इसका भयावह उदाहरण बनभूलपुरा के जवाहर नगर में सामने आया है। अपनी पत्नी और अमन ठाकुर के बीच संबंध होने का शक रखने वाले निक्की उर्फ नाटी पर अमन की हत्या करने का आरोप है। मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि उस सोच का भी है जिसमें भरोसे की जगह शक और बातचीत की जगह हिंसा ले लेती है।
जवाहर नगर में 16 सितंबर को अमन ठाकुर का शव घर के बरामदे में मिला था। मृतक की पहचान 29 वर्षीय अमन ठाकुर निवासी गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़ (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई। अमन पिछले करीब चार-पांच वर्षों से इसी घर में रह रहा था। उसके गले पर यू-आकार का निशान मिलने के बाद मौत संदिग्ध मानी गई और मामले की जांच आगे बढ़ी।
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, निक्की उर्फ नाटी अमन को पसंद नहीं करता था और उसे अपनी पत्नी के साथ अमन के संबंध होने का शक था। इसी शक को लेकर वह अपनी पत्नी और अमन से आए दिन विवाद करता था। आरोप है कि 15 सितंबर को उसने अपनी साली को फोन कर अमन अथवा अपनी पत्नी को जान से मारने की धमकी भी दी थी।
इसके अगले ही दिन अमन मृत मिला। मामले में निक्की उर्फ नाटी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी को 17 सितंबर को रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म से नीचे गौला नदी किनारे हजारा की खाली झोपड़ी से पकड़े जाने की जानकारी है। उसकी निशानदेही पर कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल दुपट्टा भी बरामद किया गया है।
यह घटना समाज के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ती है क्या शक इतना बड़ा हो सकता है कि इंसान रिश्तों की मर्यादा और एक जिंदगी की कीमत तक भूल जाए?
पति-पत्नी के रिश्ते की बुनियाद भरोसा है। मतभेद हो सकते हैं, सवाल हो सकते हैं, रिश्तों में दरार भी आ सकती है, लेकिन उसका रास्ता बातचीत, परिवार और कानून से निकलना चाहिए, हिंसा से नहीं।
शक का इलाज संवाद है, हिंसा नहीं। रिश्ते टूट सकते हैं, लेकिन किसी की जिंदगी लेने का अधिकार किसी को नहीं। यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि भरोसा कमजोर पड़े तो बात कीजिए, शक हो तो सच जानने की कोशिश कीजिए लेकिन गुस्से को फैसला मत बनने दीजिए।









