कुमाऊं की बड़ी साइंस लैब ‘हाशिए’ पर? सांसद अजय भट्ट ने रक्षा मंत्री से मिल उठाए गंभीर सवाल

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हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। कुमाऊं की अहम वैज्ञानिक संस्था रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (DIBER) को सीमित किए जाने के मुद्दे ने अब सियासी और जनस्तर पर तूल पकड़ लिया है।

सांसद अजय भट्ट ने सीधे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर न सिर्फ स्थिति पर चिंता जताई, बल्कि लैब के भविष्य को लेकर बड़ा सुझाव भी दे डाला।

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पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व नैनीताल-उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह से भेंट कर उन्हें पत्र सौंपा।

इस पत्र के माध्यम से उन्होंने जिला नैनीताल समेत पूरे कुमाऊं क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से सबसे बड़ी प्रयोगशाला “रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (DIBER), हल्द्वानी” के बंदी जैसी स्थिति में पहुंचने पर गहरी चिंता व्यक्त की और जनमानस में पैदा हो रही संशय की स्थिति को दूर करने की मांग की।

सांसद अजय भट्ट ने रक्षा मंत्री को अवगत कराया कि उनके संसदीय क्षेत्र के निवासी, व्यापारी, किसान और युवा इस प्रयोगशाला की मौजूदा स्थिति को लेकर बेहद चिंतित हैं।

उन्होंने कहा कि DIBER लैब को दिल्ली के तिमारपुर स्थित DIPAS लैब से संबद्ध कर एक छोटी परजीवी इकाई के रूप में सीमित कर दिया गया है, जिसे क्षेत्र में अत्यंत नकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।

भट्ट ने पत्र में स्पष्ट किया कि इस बदलाव का सीधा असर स्थानीय युवाओं के रोजगार, अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप, जेआरएफ, एसआरएफ और अनुबंधित अवसरों पर पड़ा है। साथ ही व्यापारियों, स्थानीय उद्योगों और उच्च हिमालयी क्षेत्रों के किसानों को मिलने वाले कृषि परामर्श व आधुनिक कृषि लाभ भी या तो काफी कम हो गए हैं या पूरी तरह बंद हो चुके हैं।

सांसद ने यह भी बताया कि हाल ही में उन्होंने DIBER हल्द्वानी लैब के प्रथम निदेशक (सेवानिवृत्त) एमसी जोशी तथा अन्य पूर्व वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से मुलाकात की, जिससे उन्हें संस्थान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं।

उन्होंने बताया कि इस प्रयोगशाला की आवश्यकता 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद महसूस की गई थी। वर्तमान में यह संस्थान हल्द्वानी (जिला नैनीताल), अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, औली (जिला चमोली) और हर्षिल (जिला उत्तरकाशी) तक फैला हुआ है। इन सभी स्थानों पर क्रमशः 35, 150, 70, 40 और 10 एकड़ यानी कुल करीब 300 एकड़ भूमि पर विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।

इसके बावजूद वर्तमान में स्थिति यह है कि हल्द्वानी में ही सीमित संख्या में कर्मचारी और अधिकारी बचे हैं, जबकि पिथौरागढ़ और औली में मिलाकर मात्र करीब 10 कर्मचारी कार्यरत हैं। इस कारण न केवल विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है, बल्कि सरकार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

भट्ट ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में DIBER लैब को DIPAS, तिमारपुर (दिल्ली) की एक सेल यानी परजीवी इकाई के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। जबकि DIPAS (रक्षा शरीरक्रिया अनुसंधान संस्थान) का मुख्य कार्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सैनिकों की शारीरिक स्थितियों का अध्ययन करना है, जो दिल्ली जैसे महानगर में प्रभावी ढंग से संभव नहीं है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सांसद अजय भट्ट ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध किया है कि DIPAS तिमारपुर, दिल्ली को हल्द्वानी, पिथौरागढ़, औली, अल्मोड़ा और हर्षिल जैसे वास्तविक हिमालयी क्षेत्रों में प्रतिस्थापित किया जाए। इससे न केवल वैज्ञानिक अपने मूल उद्देश्यों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे, बल्कि क्षेत्र में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर का भी पूरा उपयोग हो सकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार व विकास को नई गति मिलेगी।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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