
काशीपुर, प्रेस 15 न्यूज। काशीपुर में किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले ने पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में काशीपुर आईटीआई थानाध्यक्ष कुंदन रौतेला और दरोगा प्रकाश बिष्ट को निलंबित कर दिया गया है, जबकि पैगा चौकी के समस्त पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि पूरे प्रकरण में पुलिस द्वारा घोर लापरवाही और उदासीनता बरती गई।
हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है, उन्हें निलंबित और लाइन हाजिर करने का आदेश उधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने ही दिया है, जबकि दिवंगत किसान सुखवंत सिंह ने आत्महत्या से पहले उन्हीं पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।
प्रकरण में पैगा चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार, एएसआई सोमवीर सिंह, सिपाही दिनेश तिवारी, भूपेंद्र सिंह, शेखर बनकोटी, सुरेश चंद्र, योगेश चौधरी, राजेंद्र गिरी, दीपक प्रसाद और संजय कुमार को लाइन हाजिर किया गया है।
बीते रविवार को किसान सुखवंत सिंह ने गौलापार स्थित एक होटल में तमंचे से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पूर्व उन्होंने एक वीडियो वायरल किया था, जिसमें भूमाफिया पर पैसे हड़पने के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस पर, विशेषकर उधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा पर, गंभीर आरोप लगाए थे।
ऐसे में अब पीड़ित परिवार ही नहीं, बल्कि आम जनता भी यह सवाल पूछ रही है कि क्या इस पूरे मामले में कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक ही सीमित रहेगी? या फिर एसएसपी पर लगे आरोपों की भी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होगी?
यह भी एक कड़वा सच है कि पुलिसकर्मियों को सस्पेंड और लाइन हाजिर किया जाना कोई अंतिम सजा नहीं है। पूर्व में ऐसे कई उदाहरण सामने आ चुके हैं, जहां कुछ समय बाद ऐसे अधिकारी पुनः बहाल हो जाते हैं। लेकिन किसान सुखवंत सिंह की जान वापस नहीं आ सकती।
दिवंगत किसान सुखवंत सिंह दुनिया से जाते-जाते पुलिस तंत्र और उसके शीर्ष अधिकारियों पर जो सवाल छोड़ गए हैं, वे अभी भी अनुत्तरित हैं। इन सवालों पर न्याय की आवाज लगातार उठती रहेगी।
हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच कमिश्नर को सौंप दी है। इस उम्मीद कि यह जांच निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ की जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
अब यह मामला केवल एक आत्महत्या का नहीं, बल्कि किसान, न्याय और पुलिस जवाबदेही का प्रतीक बन चुका है।









