
नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। मृत्यु के सामने हर भेद समाप्त हो जाता है, लेकिन सम्मान बना रहना चाहिए। नैनीताल के युवाओं ने यही संदेश आज कर्म में उतार दिया। जिस श्मशान घाट की बदहाली अक्सर सब देख लेते हैं, पर अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं, वहीं युवाओं ने श्रमदान कर न सिर्फ गंदगी हटाई, बल्कि संवेदना और जिम्मेदारी की मिसाल भी कायम की।
नैनीताल के पाइन्स स्थित श्मशान घाट में आज सुबह युवाओं और सामाजिक संगठनों ने मिलकर एक व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया। हनुमान भक्त संगठन, नासा संगठन, रोटरी क्लब नैनीताल और शिप्रा कल्याण समिति से जुड़े लोग श्मशान घाट पहुँचे और लंबे समय से उपेक्षित सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया।
अभियान के दौरान नदी और प्लेटफॉर्म से गंदगी हटाई गई, जल प्रवाह को सुचारू किया गया तथा श्मशान घाट में पड़ी अधजली लकड़ियाँ, कपड़े और अन्य अवशेषों को साफ कर सम्मानजनक ढंग से हटाया गया। झाड़ियों की कटाई कर पूरे परिसर को व्यवस्थित किया गया। सफाई के दौरान श्मशान घाट से सैकड़ों की संख्या में शराब की बोतलें और खाली ग्लास भी मिले, जिन्हें हटाकर स्थान को पवित्र स्वरूप देने का प्रयास किया गया।
यह कोई पहला प्रयास नहीं था। इससे पहले भी इन्हीं संगठनों से जुड़े युवाओं ने श्मशान घाट की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई कर उसकी तस्वीर बदल दी थी। समय-समय पर अंतिम यात्रा स्थल की सुध लेना इन युवाओं की नियमित सामाजिक जिम्मेदारी बन चुकी है।
इस अभियान में हनुमान भक्त संगठन के पान सिंह ढैला, मनमोहन सिंह बिष्ट, किशोर सिंह ढैला, रोहित गौढ़, सुनील बिष्ट, करन चंद्रा, गोपाल सिंह, पंकज बिष्ट, नासा संगठन के यशपाल रावत और तेनजिन, शिप्रा कल्याण समिति के जगदीश नेगी, रोटरी क्लब नैनीताल के शैलेंद्र साह, यूट्यूबर एवं सामाजिक कार्यकर्ता पुष्कर करायत तथा लच्छु भाई सहित अनेक लोग शामिल रहे।
क्यों खास है यह पहल
क्योंकि यह सफाई नहीं, संस्कार का काम है। क्योंकि यह श्मशान घाट है जहाँ समाज का असली चेहरा दिखाई देता है। और क्योंकि ये युवा बता रहे हैं कि बदलाव भाषण से नहीं, श्रम से आता है।
(नैनीताल से वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)









