
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में मॉडल अध्ययन केंद्र (16000) द्वारा रविवार को नवप्रवेशित शिक्षार्थियों के लिए इंडक्शन एवं काउंसलिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम प्रातः 10 बजे विश्वविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण अकादमिक माहौल के बीच शुरू हुआ। यह उन छात्रों के लिए आयोजित किया गया था जो 17 अप्रैल को आयोजित पहले कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी एवं वरिष्ठ प्राध्यापकों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद कुलगीत प्रस्तुत कर एकता और शैक्षणिक उद्देश्य की भावना को सशक्त किया गया।
स्वागत भाषण में डॉ. विशाल शर्मा ने विश्वविद्यालय की भूमिका और दूरस्थ शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को अपने भविष्य के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. लोहानी ने छात्रों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय की सुविधाओं, छात्रवृत्ति योजनाओं, डिजीलॉकर और “हेलो हल्द्वानी FM” जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने छात्रों को स्व-अध्ययन सामग्री (SLM) के साथ अन्य संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही बताया कि विश्वविद्यालय समय-समय पर काउंसलिंग सत्र आयोजित कर समय प्रबंधन, तनाव प्रबंधन और करियर मार्गदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव देता है। परीक्षा परिणामों को लेकर उन्होंने कहा कि अधिकांश परिणाम परीक्षा समाप्ति के 15 दिनों के भीतर घोषित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित छात्रों को विश्वविद्यालय की नीतियों, सुविधाओं और ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग (ODL) प्रणाली से परिचित कराना रहा। इस दौरान विभिन्न प्राध्यापकों ने पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली, अध्ययन सामग्री वितरण (MPDD), कार्यशालाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।
प्रो. पी.डी. पंत ने अकादमिक गतिविधियों एवं अध्ययन सामग्री प्रणाली पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. रेनू प्रकाश ने ODL प्रणाली की विशेषताओं को विस्तार से समझाया।
प्रो. एम.एम. जोशी ने अध्ययन केंद्रों की उपयोगिता बताई और डॉ. सुमित प्रसाद ने प्रवेश प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं को सरल भाषा में स्पष्ट किया।
परीक्षा नियंत्रक प्रो. सोमेश कुमार ने परीक्षा एवं परिणाम संबंधी जानकारी दी, वहीं प्रो. जितेन्द्र पांडे ने MOOCs और कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। डॉ. राजेश मठपाल ने प्रायोगिक एवं कार्यशाला आधारित शिक्षण को जरूरी बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीषा पंत ने किया, जबकि समापन डॉ. विनय सिंह रावत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर लगभग 110 शिक्षार्थियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की। साथ ही परिसर में आयोजित पुस्तक मेले ने कार्यक्रम को और आकर्षक बना दिया।
इस दौरान सहायक क्षेत्रीय निदेशक रेखा बिष्ट, प्रशासनिक परामर्शदाता कमला राठौर, प्रदीप पंत, बीना फुलारा, राजेश आर्य सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे।
समग्र रूप से यह इंडक्शन एवं काउंसलिंग कार्यक्रम नवप्रवेशित शिक्षार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक साबित हुआ, जिसने उन्हें शैक्षणिक जीवन की मजबूत शुरुआत के लिए दिशा प्रदान की।









