
देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। देश में नवाचार और स्टार्ट-अप संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने AccelESG इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते से उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को नया आयाम मिलने के साथ-साथ डीप-टेक अनुसंधान, उद्यमिता और वैश्विक तकनीकी साझेदारियों को बढ़ावा मिलेगा।
आईआईटी रुड़की और AccelESG इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुआ यह समझौता नवाचार-आधारित विकास और प्रौद्योगिकी वाणिज्यीकरण को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AccelESG एक अग्रणी मंच है, जो स्टार्ट-अप्स, तकनीक हस्तांतरण और उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को सशक्त करने के लिए कार्य करता है।
इस MoU के तहत डीप-टेक नवाचार, स्टार्ट-अप मेंटरिंग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और बाज़ार-उन्मुख अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। आईआईटी रुड़की के प्रो. अभ्यानंद सिंह मौर्य के मार्गदर्शन में यह साझेदारी प्रारंभिक चरण के स्टार्ट-अप्स को समर्थन देने, उद्योग से जुड़े अनुसंधान को आगे बढ़ाने और अकादमिक विचारों को व्यावहारिक एवं स्केलेबल समाधानों में बदलने में सहायक होगी।
यह सहयोग आत्मनिर्भर भारत, स्टार्ट-अप इंडिया, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप है। साथ ही यह सतत विकास, नवाचार और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा कि यह समझौता संस्थान के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसके तहत अत्याधुनिक अनुसंधान को समाज के लिए उपयोगी समाधान में बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग और स्टार्ट-अप्स के साथ मजबूत साझेदारी से ऐसा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा, जो राष्ट्रीय विकास और वैश्विक तकनीकी प्रगति में योगदान देगा।
वहीं AccelESG इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय कॉमेरा ने कहा कि आईआईटी रुड़की के साथ यह साझेदारी अनुसंधान-आधारित विचारों को स्टार्ट-अप्स और व्यावसायिक तकनीकों में बदलने की प्रक्रिया को तेज करेगी। इससे अकादमिक जगत, उद्योग और उद्यमियों के बीच प्रभावी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
समझौते के अंतर्गत स्टार्ट-अप त्वरण कार्यक्रम, नवाचार चुनौतियाँ, मेंटरशिप पहल, सहयोगी अनुसंधान परियोजनाएँ और ज्ञान-विनिमय मंच आयोजित किए जा सकते हैं। इससे आईआईटी रुड़की के छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्ट-अप्स को उद्योग नेटवर्क और वैश्विक अनुभवों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।









