
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। पहाड़ की जिंदगी में जंगल जहां आजीविका का साधन है, वहीं कई बार यही जंगल जानलेवा भी साबित हो जाते हैं। ऐसी ही एक भयावह घटना में गुलदार के हमले से गंभीर रूप से घायल हुई एक महिला ने मौत से लड़कर नई जिंदगी पाई है। हल्द्वानी के चंदन अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने जटिल शल्यक्रिया कर महिला की जान बचाई और उसे नया जीवन दिया।
अस्पताल प्रबन्धन के अनुसार, यह दर्दनाक घटना 1 मार्च 2026 को चंपावत जिले के बाराकोट क्षेत्र में हुई। तुलसी देवी नाम की महिला रोजाना की तरह जंगल में घास काटने गई थीं। दोपहर करीब 12 बजे अचानक एक गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग भी सहम गए।
गुलदार के हमले में महिला के सिर, चेहरे, गर्दन, कंधे, छाती और पीठ पर गंभीर घाव हो गए। सिर के पीछे की त्वचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, दोनों कानों को भी गहरी चोटें आईं और चेहरे की नसों को नुकसान पहुंचा। घटना की भयावहता देखकर स्थानीय लोग भी सहम गए।
स्थानीय लोगों की मदद से घायल महिला को तुरंत लोहाघाट उप जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। साथ ही आवश्यक टीकाकरण और रेबीज से बचाव की पहली खुराक भी दी गई।
इसके बाद बेहतर उपचार के लिए महिला को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत हल्द्वानी के चंदन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें बिना किसी आर्थिक बोझ के उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों की टीम ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत उपचार शुरू किया। डॉ. सारिका गंगवार के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने पूरी संवेदनशीलता और विशेषज्ञता के साथ इलाज की जिम्मेदारी संभाली।
अस्पताल प्रबन्धन के अनुसार, 2 मार्च को घावों की सफाई और प्रारंभिक उपचार की प्रक्रिया की गई। इसके बाद 11 मार्च को जटिल शल्यक्रिया करते हुए विशेष तकनीक के माध्यम से चेहरे के क्षतिग्रस्त हिस्से को सफलतापूर्वक ठीक किया गया। शल्यक्रिया के दौरान मांसपेशियों और त्वचा के भागों का उपयोग कर चेहरे के बड़े घाव को ठीक किया गया और उपचार सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
अस्पताल की अनुभवी चिकित्सक टीम और आधुनिक उपचार सुविधाओं के कारण महिला की हालत में लगातार सुधार हुआ। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है, उन्हें हल्का भोजन दिया जा रहा है और चिकित्सकीय सलाह के साथ अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है।
महिला और उनके परिजनों ने आयुष्मान योजना के तहत मिले निशुल्क उपचार और अस्पताल की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि यदि योजना का लाभ और चिकित्सकों का समय पर सहयोग नहीं मिलता तो इतना बड़ा इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था।
यह घटना पहाड़ के उन हजारों परिवारों की हकीकत भी उजागर करती है, जो रोज जंगलों में जंगली जानवरों के खतरे के बीच अपनी आजीविका के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे समय में सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं और बेहतर चिकित्सा संस्थान जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं।









