
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। उच्च शिक्षा को दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक पहुंचाने के अपने संकल्प को और मजबूत करते हुए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) ने आगामी प्रवेश सत्र में छात्र संख्या बढ़ाने और अध्ययन केंद्रों को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मंगलवार को कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में परीक्षा व्यवस्था, छात्र हितों और नामांकन वृद्धि से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए।
बैठक में कुलपति प्रो. लोहनी ने सभी अध्ययन केंद्रों को पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 50 प्रतिशत अधिक विद्यार्थियों के नामांकन का लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की वास्तविक ताकत उसके अध्ययन केंद्र हैं, जो दूर-दराज के क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करते हैं।
बैठक में निदेशक क्षेत्रीय सेवाएं प्रो. गिरिजा पांडेय, अतिरिक्त निदेशक प्रो. एमएम जोशी, सहायक कुलसचिव रत्ती डोगरा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. सोमेश कुमार, प्रशासनिक अधिकारी पीएस परिहार सहित विभिन्न अध्ययन केंद्रों के समन्वयक, सहायक समन्वयक, क्षेत्रीय निदेशक एवं सहायक क्षेत्रीय निदेशक उपस्थित रहे।
परीक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए निर्देश दिए गए कि जिन अध्ययन केंद्रों में परीक्षा सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, वे निकटवर्ती परीक्षा केंद्रों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएं। साथ ही परीक्षा संबंधी सभी देयकों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को फीस प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन सत्यापन हेतु हल्द्वानी आने में होने वाली कठिनाइयों पर चर्चा करते हुए जिला स्तर पर ही सत्यापन व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा नए अध्ययन केंद्रों को ओवरहेड राशि उपलब्ध कराने तथा हाल के वर्षों में स्थापित केंद्रों को प्रचार-प्रसार के लिए अग्रिम धनराशि देने पर सहमति बनी।
कुलपति ने उन अध्ययन केंद्रों में पुस्तक मेले आयोजित करने के निर्देश भी दिए, जहां अभी तक ऐसे आयोजन नहीं हुए हैं, ताकि विश्वविद्यालय की योजनाओं और पाठ्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा सके।
प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में सभी अध्ययन केंद्रों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।









