
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। कानून ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि बेटियों की अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों के लिए समाज और न्याय व्यवस्था में कोई जगह नहीं है।
किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के दोषी को पोक्सो कोर्ट ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाकर न केवल पीड़िता को न्याय दिलाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि बेटियों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं और ऐसे अपराधों पर कानून की सबसे सख्त नजर है।
नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर सख्त रुख अपनाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश एवं पोक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मनमोहन सिंह ने किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और दुष्कर्म करने के दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा।
मामला 2 जून 2023 का है, जब एक महिला ने हल्द्वानी कोतवाली में अपनी पोती की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि राजपुरा क्षेत्र निवासी संदीप शर्मा किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और पीड़िता व आरोपी की तलाश में टीमें लगाई गईं।
जांच के दौरान पुलिस ने किशोरी को सितारगंज क्षेत्र से बरामद किया और आरोपी संदीप शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामले की सुनवाई पोक्सो कोर्ट में हुई, जहां अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर बचाव पक्ष अपने तर्क सिद्ध नहीं कर सका।
अदालत ने आरोपी को किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म का दोषी मानते हुए उसे कठोरतम सजा सुनाई। कोर्ट के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर कड़ा संदेश माना जा रहा है कि ऐसे मामलों में कानून किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा।









