
रुद्रपुर, प्रेस 15 न्यूज। जिस खाकी को बेटियों की ढाल होना था, वही खाकी दरिंदगी के आरोपों में घिर गई। रक्षक बनने की शपथ लेने वाला जब भक्षक बन जाए, तो कानून नहीं भरोसा टूटता है। ‘मित्र पुलिस’ का दावा एक बार फिर सवालों के कटघरे में है और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा वर्दी के ही हाथों लहूलुहान होता दिख रहा है।
रुद्रपुर पुलिस लाइन में तैनात एक कांस्टेबल पर किशोरी से छेड़छाड़ का गंभीर आरोप सामने आया है। किशोरी की मां की तहरीर पर थाना पंतनगर पुलिस ने आरोपी कांस्टेबल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामला संज्ञान में आते ही एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने आरोपी कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम एक किशोरी रोजाना की तरह मनोज सरकार स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल प्रशिक्षण के लिए जा रही थी।
आरोप है कि पुलिस लाइन के पास नशे में धुत कांस्टेबल त्रिभुवन जोशी ने उसका हाथ पकड़कर जबरन खींचा और आपत्तिजनक हरकतें कीं। किशोरी किसी तरह खुद को छुड़ाकर वहां से भागी और स्टेडियम पहुंचकर साथियों और परिजनों को घटना की जानकारी दी।
इसके बाद परिजन पंतनगर थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। किशोरी की मां की तहरीर पर आरोपी कांस्टेबल त्रिभुवन जोशी, निवासी पुलिस लाइन रुद्रपुर, के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने आरोपी को निलंबित कर दिया है और उसके अन्य जिले में तबादले को लेकर उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।
निलंबन नहीं, जवाबदेही चाहिए
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है। जब वर्दी वाले ही बेटियों पर भूखे भेड़ियों की तरह टूटेंगे तो समाज किस पर भरोसा करेगा? ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे सबसे पहले वही लोग खतरे में डाल रहे हैं, जिनके कंधों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है। यह उत्तराखंड की ‘मित्र पुलिस’ की छवि पर सीधा धब्बा है।
पहले भी कठघरे में रही है पुलिस
उधम सिंह नगर पुलिस पहले से ही विवादों में रही है। हाल ही में काशीपुर के किसान सुखवंत आत्महत्या मामले में आईटीआई थानाध्यक्ष कुंदन सिंह रौतेला, एसआई प्रकाश बिष्ट समेत पैगा चौकी के 12 पुलिस कर्मियों का तबादला चमोली और रुद्रप्रयाग किया गया। अब उन जिलों में भी आरोपियों को भेजे जाने से स्थानीय लोगों में गुस्सा है मानो गलती की सजा नहीं, केवल जिले बदल देना ही विभाग की कार्रवाई बन गया हो।
आज जरूरत महज निलंबन या तबादले की नहीं, बल्कि कड़ी कार्रवाई और सख्त संदेश की कि वर्दी कानून से ऊपर नहीं है। वरना रक्षक से भक्षक बनती यह तस्वीर पुलिस की साख के साथ-साथ समाज के भरोसे को भी चकनाचूर कर देगी।









