
कोटाबाग, प्रेस 15 न्यूज। हौसले मजबूत हों तो छोटे से गांव की महिलाएं भी बड़ी मिसाल बन सकती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अगर इरादे पक्के हों, तो मेहनत की खुशबू दूर तक फैलती है और यही कर दिखाया है कोटाबाग की गीता पंत ने, जिन्होंने फूलों की खेती से अपनी पहचान ‘लखपति दीदी’ के रूप में बनाई।
कोटाबाग क्षेत्र के एक छोटे से गांव से निकली गीता पंत ने मेहनत, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन के दम पर अपनी किस्मत बदल दी। फूलों की खेती को अपनाकर न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का रास्ता खोल दिया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर गीता पंत आज एक मिसाल बन चुकी हैं।
सहायक परियोजना निदेशक चंदा फर्त्याल ने बताया कि ग्राम पंचायत बजुनिया हल्दू विकासखंड कोटाबाग निवासी गीता पंत संतोषी स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने समूह में सक्रिय भूमिका निभाई और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) के रूप में जिला और राज्य स्तर पर भी कार्य किया। इस दौरान उन्हें विभिन्न योजनाओं की जानकारी मिली, जिससे उनके आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
गीता पंत ने पारंपरिक पशुपालन और कृषि कार्य के साथ कुछ नया करने की ठानी और फूलों की खेती की ओर कदम बढ़ाया। इस कार्य के लिए उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सीआईएफ (CIF) और सीसीएल (CCL) से आर्थिक सहायता प्राप्त की। मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने फूलों की खेती को सफल व्यवसाय में बदल दिया।
आज गीता पंत न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि स्वयं सहायता समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उनकी वार्षिक आय करीब 6 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिससे वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
सहायक परियोजना निदेशक चंदा फर्त्याल ने बताया कि गीता पंत जैसी महिलाएं अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं और यह उदाहरण दर्शाता है कि सही दिशा और संसाधनों के साथ महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।









