
नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। जनपद में कृषि, बागवानी और आवासीय प्रयोजनों के लिए आवंटित भूमि के दुरुपयोग पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला मजिस्ट्रेट नैनीताल ललित मोहन रयाल की न्यायालय ने भूमि उपयोग एवं भू-सुधार कानूनों के उल्लंघन से जुड़े विभिन्न मामलों में सुनवाई करते हुए कई भूखंडों को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश जारी किए हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई को भूमि माफियाओं और नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
जिलाधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कैंचीधाम क्षेत्र के ग्राम छड़ा, पट्टी मझेड़ा निवासी आनंद सिंह एवं राजेंद्र सिंह पुत्रगण पूरन सिंह को कृषि कार्य के लिए पट्टे पर दी गई भूमि पर आवासीय मकान एवं दुकान का निर्माण कर लिया गया था।
मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने 0.033 हेक्टेयर नॉन-ज़ेडए भूमि का पट्टा निरस्त करते हुए उसे राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए।
एक अन्य मामले में हल्द्वानी तल्ली निवासी बच्ची राम, मोहन चंद्र, लीला देवी और भगवती देवी द्वारा सामान्य जाति की महिला के पक्ष में 750 वर्ग फीट भूमि का अंतरण किया गया था। जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर न्यायालय ने उक्त भूमि को अंतरण की तिथि से ही राज्य सरकार में निहित करने का आदेश पारित किया।
तहसील रामनगर के ढेला बंदोबस्ती निवासी बाग सिंह को कृषि प्रयोजन के लिए श्रेणी-1(ख) के अंतर्गत 0.100 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन निरीक्षण में वहां रिसॉर्ट संचालित होता पाया गया। पूर्व में रिसॉर्ट को सील भी किया जा चुका था। पट्टे की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर पूरी भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए गए।
इसी तरह कुमाऊं पेपर पैक्स प्राइवेट लिमिटेड, रामनगर तथा उससे संबद्ध रमेश चावला, रचित चावला, मीना चावला एवं कनिका चावला द्वारा आवासीय प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि पर रिसॉर्ट संचालन किया जा रहा था। भूमि उपयोग परिवर्तन के नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 3572 वर्ग मीटर भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश पारित किया गया है।
वहीं, एक अन्य प्रकरण में प्रतापगढ़ (कुंडा) निवासी भानवी सिंह द्वारा श्री कैंचीधाम क्षेत्र के ग्राम सुल्तान में बागवानी प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 27 नाशपाती के वृक्ष एवं उनके लिए आवश्यक छह फीट चौड़ा पहुंच मार्ग सुरक्षित पाए जाने पर 0.0344 हेक्टेयर भूमि उनके पक्ष में बरकरार रखी गई, जबकि शेष 0.5206 हेक्टेयर भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए गए।
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय की इन कार्यवाहियों को भूमि उपयोग नियमों के प्रभावी अनुपालन तथा कृषि एवं बागवानी प्रयोजन के लिए आवंटित भूमि के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ी और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है।









