
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। वाहन खरीदारों से अवैध वसूली के आरोप अब सिर्फ शिकायत नहीं रहे, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में दर्ज तथ्य बन चुके हैं।
भीमताल के ब्लॉक ऑफिस के पास कालिका कुंज निवासी चंद्रशेखर जोशी ने हल्द्वानी में वाहन खरीदारों से हो रही इसी मनमानी लूट से पर्दा उठाया है।
सीएम पोर्टल में 8 नवंबर 2025 को शिकायत दर्ज करते हुए बताया कि उन्होंने बजरंग ऑटो रामपुर रोड से एक स्कूटी खरीदी।
जिसके बाद आरटीओ रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर उनसे 8777 रुपए मांगे गए। जब चंद्रशेखर जोशी ने आपत्ति जताई तो उन्हें 7147 रुपए की रसीद थमाते हुए कहा गया कि अब वे फाइल खुद पंजीयन कराने के लिए आरटीओ ऑफिस जाएं क्योंकि वहां भी कई जगह पैसे देने पड़ते हैं।
हल्द्वानी रामपुर रोड स्थित बजरंग ऑटो की अवैध वसूली वाली इस मनमानी की शिकायत सीएम पोर्टल तक पहुंची तो आरटीओ ने भी शिकंजा कसते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

कार्यालय सम्भागीय परिवहन अधिकारी, हल्द्वानी-नैनीताल द्वारा जारी पत्र ( 17.01.2026) में कहा गया है कि भीमताल निवासी शिकायतकर्ता चन्द्रशेखर जोशी से बजरंग ऑटो द्वारा वाहन पंजीयन (RTO Registration) के नाम पर ₹8777 की मांग की गई, जबकि वास्तविक रूप से आरटीओ में केवल ₹7147 ही जमा किए गए। यानी ₹1630 की अतिरिक्त और अवैध वसूली का मामला सरकारी जांच में साबित हो गया।
पैसा नहीं दिया तो फाइल उपभोक्ता के हाथ में थमा दी
आरटीओ के नोटिस में यह भी दर्ज है कि जब शिकायतकर्ता चंद्रशेखर जोशी ने अतिरिक्त धनराशि देने से इनकार किया, तो बजरंग ऑटो ने डीलर की जिम्मेदारी निभाने से इनकार करते हुए पूरी रजिस्ट्रेशन फाइल उपभोक्ता को सौंप दी और स्वयं आरटीओ कार्यालय में फाइल प्रस्तुत नहीं की। यह कृत्य सीधे-सीधे आरटीओ के आदेशों का उल्लंघन है।
RTO के आदेशों को ठेंगा
आरटीओ द्वारा पहले ही पत्र संख्या 1983/कर पंजीयन/2025 (03.06.2025), 2960/कर पंजीयन/2025 (12.09.2025) के माध्यम से सभी डीलरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नए वाहनों की पंजीयन फाइल डीलर या उसका अधिकृत प्रतिनिधि ही प्रस्तुत करेगा। कर एवं फीस के अतिरिक्त उपभोक्ता से कोई भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इसके बावजूद बजरंग ऑटो द्वारा ₹8777 की मांग करना और जिम्मेदारी उपभोक्ता पर डालना नियमों की खुली अवहेलना मानी गई है।
आरटीओ के नोटिस में बजरंग ऑटो को 03 दिन के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया या आदेशों का उल्लंघन सिद्ध हुआ
तो डीलर के ट्रेड सर्टिफिकेट (TC) के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, यहां तक कि डीलरशिप की आईडी बंद करने तक की कार्यवाही संभव है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी डीलर की होगी।
अब सवाल सिस्टम पर नहीं, डीलर पर यह मामला अब केवल एक उपभोक्ता की शिकायत नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज उपभोक्ता शोषण बन चुका है।
बड़ा सवाल यह है क्या बजरंग ऑटो लंबे समय से इसी तरीके से वाहन खरीदारों से अवैध वसूली करता रहा है? कितने लोग बिना सवाल किए यह अतिरिक्त पैसा देते रहे? सवाल यह भी कि आरटीओ दफ्तर में भी कई जगह पैसे देने पड़ते हैं, वाली बात की भी क्या जांच होगी?
यह नोटिस अन्य वाहन खरीदारों के लिए चेतावनी और हिम्मत दोनों है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बजरंग ऑटो जवाब देता है या कार्रवाई झेलता है।









