
चम्पावत, प्रेस 15 न्यूज। डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर अपराध अब केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं, बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता, सामाजिक सुरक्षा और सूचना तंत्र पर सीधा हमला बनते जा रहे हैं।
फोटो, प्रोफाइल और नाम का दुरुपयोग कर लोगों को भ्रमित करना साइबर गिरोहों की नई रणनीति बन चुकी है। इसी खतरनाक डिजिटल प्रवृत्ति का उदाहरण चम्पावत में सामने आया है, जहां अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों ने जिलाधिकारी मनीष कुमार की फोटो लगाकर व्हाट्सएप पर फर्जी आईडी बनाते हुए अधिकारियों से संपर्क साधने का प्रयास किया।
बुधवार को वियतनाम के मोबाइल नंबर +84 564261676 से जिले के कई अधिकारियों को अंग्रेजी भाषा में व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए। प्रोफाइल फोटो में डीएम की तस्वीर लगी होने के कारण प्रथम दृष्टया भ्रम की स्थिति बनी, लेकिन विदेशी नंबर होने पर अधिकारियों ने सजगता दिखाते हुए तुरंत सतर्कता बरती।
वन विभाग के एसडीओ सुनील कुमार को भी इसी नंबर से “Hello” का संदेश मिला। उन्होंने संदेह होने पर तत्काल डीआईओ धीरज कार्की को सूचना दी, जिसके बाद नंबर को ब्लॉक किया गया और पूरे मामले से जिलाधिकारी को अवगत कराया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने न केवल पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई, बल्कि फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट का स्क्रीनशॉट अपने स्टेटस पर साझा कर अधिकारियों और आम नागरिकों को जागरूक किया।
उन्होंने अपील की कि किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल, अनजान नंबर या पहचान का दावा करने वाले अकाउंट से सतर्क रहें और बिना आधिकारिक पुष्टि किसी भी प्रकार का संवाद या लेन-देन न करें।
पुलिस ने जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से प्राप्त तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है तथा जांच साइबर सेल द्वारा की जा रही है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचने की कार्रवाई जारी है।
बताते चलें कि इससे पूर्व अगस्त 2024 में भी तत्कालीन जिलाधिकारी नवनीत पांडेय की फर्जी व्हाट्सएप आईडी बनाकर अधिकारियों से धनराशि मांगने का प्रयास किया गया था। वहीं कुछ वर्ष पूर्व तत्कालीन सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों से ठगी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
अलर्ट रहें सुरक्षित रहें
सिर्फ फोटो और नाम देखकर पहचान तय न करें।
विदेशी या अनजान नंबर से आए संदेशों से सतर्क रहें।
पैसे, ओटीपी, लिंक या निजी जानकारी साझा न करें।
फर्जी अकाउंट को तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करें।
किसी भी संदेह की सूचना पुलिस/साइबर सेल को दें।









