नैनीताल: आरटीआई की आड़ में 3000 पन्नों का तमाशा रचने वाले प्रधान सहायक पर गिरी जिलाधिकारी की गाज

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नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। सूचना का अधिकार नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र को जाम करने की साज़िश। नैनीताल जिलाधिकारी कार्यालय से सामने आए इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।

अपने ही कार्यालय पर आरटीआई की बौछार कर सरकारी मशीनरी को उलझाने वाले प्रधान सहायक मोहम्मद अकरम पर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने ऐसा चाबुक चलाया कि कुर्सी भी गई और जिला मुख्यालय भी।

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मामला साफ है अकरम ने विभिन्न पटलों से बेतहाशा सूचना मांगी। सीमित स्टाफ और दबाव के बीच लोक सूचना अधिकारियों ने दिन-रात खून-पसीना बहाकर करीब 3000 पन्नों का रिकॉर्ड तैयार किया और एक रुपये की मांग किए बिना सूचना उपलब्ध करा दी।

लेकिन इसके बाद हुआ खुला प्रशासनिक मजाक। सूचना तैयार होने के बाद अकरम ने उसे लेने से इनकार कर दिया।

इस हरकत को जिलाधिकारी ने सरकारी समय, श्रम और संसाधनों की सुनियोजित बर्बादी करार दिया। आदेश में दो टूक लिखा गया है कि आरटीआई पारदर्शिता का औज़ार है, दफ्तरों को पंगु बनाने का हथकंडा नहीं।

सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि आरटीआई का दुरुपयोग कानून की आत्मा पर सीधा हमला है।

आदेश में यह भी साफ कहा गया कि एक लोक सेवक द्वारा अपने ही कार्यालय से इस तरह सूचना मांगना और फिर उसे ठुकराना न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि सरकारी आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है।

इसे प्रशासन ने असहनीय और अक्षम्य कृत्य माना।नतीजा औपचारिक भर्त्सना, कठोर अंतिम चेतावनी, जिला मुख्यालय से तत्काल स्थानांतरण

प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है कि आरटीआई को निजी एजेंडा या बदले की राजनीति का हथियार बनाने वालों के लिए सिस्टम में कोई जगह नहीं है। अब आगे यदि किसी कर्मचारी ने आरटीआई के नाम पर सरकारी तंत्र से खिलवाड़ किया, तो कार्रवाई और भी बेरहम होगी।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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