
अल्मोड़ा, प्रेस 15 न्यूज। पहाड़ की प्रतिभा जब कुछ कर गुजरने की ठान ले तो सीमित संसाधन भी उसके हौसले के सामने छोटे पड़ जाते हैं। अल्मोड़ा निवासी रवि टम्टा ने अपने नवाचार, तकनीकी कौशल और जुनून के दम पर ऐसा ही कर दिखाया है। उन्होंने खुद तैयार किए गए सिंगल सीटेड फ्लाइंग व्हीकल ‘हैपिडा स्काइनेक्स’ की सफल ट्रायल उड़ान भराकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
रवि की इस उपलब्धि की खास बात यह है कि उन्होंने यह फ्लाइंग डिवाइस पूरी तरह इलेक्ट्रिक पावर से संचालित तैयार किया है। यानी उड़ान के इस प्रयोग में आधुनिक तकनीक के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का विचार भी जुड़ा हुआ है।
संसाधन सीमित थे, लेकिन सपनों की उड़ान बड़ी थी
रवि टम्टा की कहानी सिर्फ एक मशीन बनाने और उसे उड़ाने की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी है, जिसमें सुविधाओं का इंतजार करने के बजाय उपलब्ध संसाधनों से कुछ नया करने का साहस है।
अपने तकनीकी कौशल और लगातार प्रयासों से रवि ने ‘हैपिडा स्काइनेक्स’ को आकार दिया और फिर उसे जमीन से आसमान तक पहुंचाया। स्थानीय हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम में प्रशासन की निगरानी और आवश्यक सुरक्षा मानकों के बीच उन्होंने अपने बनाए फ्लाइंग व्हीकल की ट्रायल उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की।
यह उड़ान रवि के लिए केवल कुछ क्षणों का परीक्षण नहीं थी, बल्कि लंबे समय की मेहनत, प्रयोग और अपने सपने पर भरोसे का परिणाम थी।
रवि ने दिखाया, नई सोच हो तो पहाड़ से भी उड़ान संभव
रवि टम्टा का नवाचार इस बात की मिसाल है कि प्रतिभा बड़े शहरों या बड़े संसाधनों की मोहताज नहीं होती। अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर अपने दम पर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल तैयार करना युवाओं में मौजूद वैज्ञानिक सोच और तकनीकी क्षमता की ताकत को सामने लाता है।
रवि की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे संवाद कर उनके प्रयास की सराहना की और इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया। रवि को आगे भी अपने नवाचारों को विकसित करने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया गया।
लेकिन रवि की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही है कि उन्होंने सिर्फ उड़ने का सपना नहीं देखा, बल्कि उसे तकनीक, मेहनत और हौसले से जमीन पर उतारकर सच कर दिखाया।
रवि टम्टा की उड़ान उन युवाओं के लिए संदेश है जो संसाधनों की कमी को अपनी मंजिल की राह में बाधा मानते हैं संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सोच, हुनर और हौसले की कोई सीमा नहीं होती।
रवि टम्टा अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम के पास स्थित काफलीखान गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता एक मोटर मैकेनिक हैं।
उन्होंने बिना किसी औपचारिक साइंस बैकग्राउंड या बड़ी लैब के, अपने सीमित संसाधनों और सालों की कड़ी रिसर्च के दम पर इस सपने को सच कर दिखाया है। इससे पहले भी वे दुनिया का सबसे तेज EV चार्जर, मोबाइल से चार्ज होने वाले जूते और स्मार्ट बांस की छड़ी जैसे कई उपयोगी आविष्कार कर चुके हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरपु ने भी रवि की इस ऐतिहासिक सफलता की सराहना की है और इसे देश के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया है। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट अभी प्रोटोटाइप चरण में है और इसे व्यावसायिक उपयोग में लाने के लिए आगे के परीक्षणों और विमानन नियमों (DGCA) की मंजूरी की आवश्यकता होगी।








