
लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। आपदा में नहर ध्वस्त होने के बाद सिंचाई ठप पड़ गई और उपजाऊ खेत बंजर होने लगे। खेती प्रभावित हुई तो कई परिवार गांव छोड़कर चले गए। नेपाल सीमा से लगे नगरूघाट क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपने बीच पहुंचे जिलाधिकारी मनीष कुमार के सामने यह पीड़ा रखी।
अवकाश के दिन सीमांत गांवों के भ्रमण पर पहुंचे जिलाधिकारी ने लोगों से सीधे बातचीत कर सड़क, सिंचाई और अन्य सुविधाओं की स्थिति जानी। बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं तैयार करने के लिए उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन किया।
जिलाधिकारी ने स्वयं को किसान बताते हुए ग्रामीणों की कठिनाइयों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने बुजुर्गों से क्षेत्र की आवश्यकताओं और विकास की संभावनाओं पर सुझाव लिए। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार किसी जिलाधिकारी को अपने बीच पाकर उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिला है।
पासम-बलूटा-नगरूघाट सड़क की दुर्दशा पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता को मार्ग शीघ्र यातायात योग्य बनाने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों ने नगरूघाट मंदिर के सौंदर्यीकरण और मंदिर से डूंगरालेटी को जोड़ने वाले आपदा में ध्वस्त पुल के पुनर्निर्माण की मांग की। जीआईसी रौशाल में विज्ञान प्रयोगशाला और खेल मैदान की आवश्यकता भी बताई गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि टनकपुर-जौलजीवी सड़क क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पर्यटन और एंग्लिंग गतिविधियों को बढ़ावा देकर रोजगार की संभावनाएं विकसित करने पर भी उन्होंने जोर दिया। भ्रमण के दौरान उन्होंने बच्चों को क्रिकेट किट दी और बाबा नगरूघाट मंदिर में दर्शन किए।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)











